UK-India research projects on ‘Water Quality Research’ and ‘Energy Demand Reduction in Built Environment’ were launched today by Dr V K Saraswat, Member, National Institution for Transforming India (NITI) Aayog, Professor Ashutosh Sharma, Secretary, Department of Science and Technology (DST) India and Daniel Shah, Director, Research Councils UK (RCUK) India.

The ‘Water Quality Research’ programme has eight projects and ‘Energy Demand Reduction in Built Environment’ programme has four projects, with a total joint investment of up to £15 million. These projects aim to deliver mutual benefits and research solutions not only to the UK and India but also to address shared global sustainable development goals – clean water and clean energy.

Dr Saraswat, Professor Sharma and Mr Shah commended the true partnership in high-quality, high-impact research between the two nations and their research communities, and wished them success. They released joint catalogues highlighting the potential impact of these projects.

  • DST – The UK’s Natural Environment Research Council (NERC) and Engineering and Physical Sciences Research Council (EPSRC) on Water Quality Research
  • DST - Engineering and Physical Sciences Research Council (EPSRC), Economic and Social Research Council (ESRC) programme on Energy Demand Reduction in Built Environment.


A dossier highlighting India’s national efforts in Building Energy Efficiency comprising details of 30 projects was also released on the occasion.

The ceremony was preceded by an initiation meeting of the ‘Water Quality Research’ projects, providing an opportunity for lead researchers to present their work,   understand how they can work together to deliver a coherent programme and identify any research gaps or potential overlaps. A similar initiation event is planned for ‘Energy Demand Reduction in Built Environment’ projects on 20th February 2018.

This meeting brought together senior Indian government officials, funding partners (DST, NERC and EPSRC with support from RCUK India), and scientists both from the UK and India.

Sir Dominic Asquith KCMG, British High Commissioner to India said, “Access to clean water and efficient energy are crucial to the well-being and prosperity of every nation.  I congratulate the UK-India research teams leading these projects. Another great example of how the UK and India’s research partnership is a global force for good.”

Dr V K Saraswat, Member of National Institution for Transforming India (NITI) Aayog, highlighted thrust of the Government on Sustainable Development through synergistic efforts and greater inter-ministerial coordination.  “The ambitious targets and missions for renewable energy and energy efficiency for meeting ever increasing needs of the country is an illustration of governments’ commitment. The success achieved in LED programme can be replicated in building sector with scientific inputs.

Research on water quality is extremely critical for our national missions on Ganga rejuvenation and Swachha Bharat.” Highlighting the new initiatives for cleaner fuels such as methanol and desalination, he stressed upon the need to leverage global experience and collaborative endeavour to accelerate the innovations in the very important domains of water and clean energy and lauded the efforts of EPSRC, NERC, DST and all participants of these programmes

Professor Ashutosh Sharma, Secretary, Department of Science and Technology, said, “Department of Science and Technology accords high priority to development of cost effective and environment friendly technological solutions for clean energy, clean water and clean air. The global research fraternity has to play a pivotal role in making these pursuits successful and we intend to pursue these objectives both through our national and collaborative endeavours. Sustained India and UK research collaboration in all domains, especially clean technologies has scaled greater heights and is a valuable instrument to bring best brains together for addressing societal challenges.”

Daniel Shah, Director Research Councils UK (RCUK) India said, “This India-UK water quality programme, supported jointly by the Department of Science and Technology in India, and NERC, EPSRC and ESRC in the UK, aims to equip local communities, policymakers, regulators and businesses with the information and solutions they need to secure the provision of clean water, rejuvenate rivers and restore ecosystems. These eight collaborative research projects should bring benefits to both people and the environment, and we are delighted that the programme is being launched today.”




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महाराष्ट्र के राज्यपाल श्रीमान सी विद्यासागर राव जी, मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, देश-विदेश से आए उद्यमीगण और अन्य महानुभाव। Magnetic Maharashtra में आप सभी का स्वागत है।


समर्द्ध अणि सम्पन्न महाराष्ट्राचा निर्मिती करता होणारा मेग्नेटिक महाराष्ट्राला माझा खुप - खुप शुभेच्छा।


बंधू भगिनीनो सर्वाना माझा नमस्कार।


मुझे साइंस की बारीकियों का तो बहुत ज्ञान नहीं है लेकिन मुझे बताया गया है कि मेग्नेटिक फील्ड में Direction और Magnitude, दोनों का ही inclusion होता है।


यहां आने से पहले मैं नवी मुंबई एयरपोर्ट और JNPT  के कार्यक्रमों में था। आज के ये दो कार्यक्रम महाराष्ट्र की मेग्नेटिक फील्ड के Direction और Magnitude, दोनों ही की झलक हैं। वैसे ये भी Fact है कि आप जितना ज्यादा सेंटर के पास होते हैं, Magnetic Lines की ताकत भी उतनी ही महसूस होती है।


आज यहां इस आयोजन में आपका ये उत्साह, आपका ये जोश, ये पूरा charged atmosphere इस बात का सबूत है कि Magnetic Maharashtra की Magnetic Lines कितनी शक्तिशाली हैं।


साथियों, ये आयोजन cooperative competitive federalism का बेहतरीन उदाहरण है।


 आज देश के सभी राज्यों में आपस में एक कम्पटीशन हो रही है, स्पर्धा हो रही है।


इंफ्रास्ट्रक्चर, एग्रीकल्चर, टेक्सटाइल, हेल्थकेयर, एजूकेशन, सोलर एनर्जी, ऐसे तमाम अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए इस प्रकार के Events का आयोजन देश के अलग अलग राज्यों में हो रहा है।

राज्य अपनी-अपनी जरूरतों के हिसाब से किस क्षेत्र में कहां निवेश होना है, इस पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।


हाल ही में मुझे असम में "Advantage Assam" Investors Summit में हिस्सा लेने का अवसर मिला था। कुछ वर्ष पहले तक, कोई सोच भी नहीं सकता था कि North East में निवेश को लेकर इतनी अच्छी ब्रांडिंग हो सकती है।


झारखंड,  मध्य प्रदेश, अनेक राज्यों में इस तरह के आयोजन हो रहे हैं। गुजरात से जो सिलसिला शुरू हुआ, उसका प्रभाव  आज पूरे देश में देखने को मिल रहा है।


साथियों, मैं महाराष्ट्र सरकार को इस आयोजन के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।  पिछले तीन साल में महाराष्ट्र सरकार ने Investment का माहौल मजबूत करने के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। राज्य सरकार की निरंतर कोशिशों ने वर्ल्ड बैंक की Ease of Doing Business की रैकिंग में रिकॉर्ड बदलाव लाने में बहुत बड़ी मदद की है।  फडणवीस सरकार के Reforms ने महाराष्ट्र को Transform करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।

Ease of Doing Business के 10 में से 9 पैरामीटर्स, जैसे Ease of Getting Electricity, Ease of Paying Taxes, इन सब चीज़ों  में improvement होना अपने आप में बहुत बड़ा Noticeable factor है।


इतने व्यापक स्तर पर बदलाव तब आते हैं जब Policy Reform के माध्यम से Governance में एक नया Work Culture विकसित किया जाता है। जब परियोजना के सामने रही दिक्कतों को सुलझाने के लिए प्रक्रियाओं की डी-बौटल-नेकिंग की जाती है, जब inter- departmental co-ooperation बढ़ाया जाता है,

जब Time Limit में फैसले लिए जाते हैं।


जिस Magnetic Field की मैं पहले बात कर रहा था, वो ऐसे ही Create होती है। इसका प्रभाव निवेश पर नजर आता है, राज्य के विकास में नजर आता है। और यही वजह है कि पिछले साल महाराष्ट्र Infrastructure Projects में Total Expenditure में देश के हर राज्य से आगे था। फ्रॉस्ट and सुलेवोन्स  की रेंकिंग में महाराष्ट्र को Overall Development में देश का नंबर एक राज्य बताया गया था। वर्ष 2016-17 में देश में जितना भी Foreign Direct Investment आया है, उसका करीब करीब 51 प्रतिशत महाराष्ट्र में निवेश किया गया है। इसी तरह जब यहां फरवरी 2016 में Make in India Week मनाया गया, तो इंडस्ट्री सेगमेंट में लगभग 4 लाख करोड़ रुपए के समझौते हुए। इनमें से 2 लाख करोड़ रुपए के Investment Projects पर काम भी शुरू हो चुका है।


आज महाराष्ट्र में चल रहे इंफ्रास्ट्रक्टर प्रोजेक्ट्स पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहे हैं। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रोजेक्ट को पूरी दुनिया के 100 Most Innovative Project में से एक गिना गया है। नवी मुंबई एयरपोर्ट का निर्माण, मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक का निर्माण, आने वाले दिनों में इस क्षेत्र के करोड़ों लोगों के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव उससे आने वाला है। इसके अलावा मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, नागपुर में तैयार होने वाले करीब-करीब 350 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क भी यहां पर विकास और निवेश, दोनों की नई संभावनाएं लेकर रहा है 


साथियों, एक विशेष प्रोजेक्ट जिसकी मैं चर्चा करना चाहूंगा, वो है महाराष्ट्र समृद्धि कॉरिडोर। ये प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों को, यहां के Agriculture Sector, Agro-Based Industries को विकास की नई ऊँचाई पर ले जाने की क्षमता रखता है। महाराष्ट्र में 700 किलोमीटर लंबे Super Comunication Expressway का निर्माण, Expressway के किनारे स्मार्ट सिटी की तरह 24 नए Nodes का विकास, राज्य के कम से कम 20 से 25 लाख लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर इसके अंदर निहित है।


मुझे खुशी है कि अब महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को देश का पहला Trillion Dollar Economy वाला राज्य बनाने का लक्ष्य तय किया है। शिवाजी महाराज की भूमि पर कोई भी लक्ष्य प्राप्त करना कठिन नहीं होता है। और मुझे उम्मीद है कि उनके आशीर्वाद से महाराष्ट्र सरकार इस लक्ष्य को भी प्राप्त करेगी और ये राज्य देश का पहला Trillion Dollar Economy वाला राज्य बनेगा।


साथियों, मैं मानता हूं कि देश का विकास तभी संभव है, जब राज्यों का भी विकास हो। महाराष्ट्र का विकास भारत के बढ़ते हुए सामर्थ्य का प्रतीक है कि हम इस तरह के बड़े लक्ष्य तय कर पा रहे हैं। ये देश में बदली हुई सोच, बदले हुए हालात का जीता-जागता उदाहरण है।


मुझे याद है कुछ साल पहले जब भारत पहली बार Trillion Dollar Economy क्लब में आया था तो कितनी बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनी थी। लेकिन इसके बाद के कुछ वर्ष घोटालों की भेंट चढ़ गए। देश में तब एक अलग ही तरह का वातावरण बन गया था। तब Trillion Dollar क्लब की नहीं, Fragile Five की बात हुआ करती थी।


पिछले तीन साढ़े तीन वर्षो में सरकार के निरंतर प्रयास का परिणाम है कि अब  Five Trillion Dollar क्लब की बात होने लगी है। दुनिया की बड़ी-बड़ी एजेंसियां कह रही हैं कि अगले कुछ वर्षों में भारत Five Trillion Dollar क्लब में शामिल हो जाएगा।


साथियों, ये विश्वास ऐसे ही नहीं आया है। इसके पीछे People friendly, Development friendly और Investment friendly माहौल बनाने का एक विजन है, उसके पीछे प्रयास है। छोटे-छोटे issues को पकड़कर, छोटी-छोटी चुनौतियों को समझते हुए, हम समस्याओं को सुलझा रहे हैं। Governance को हम उस स्तर पर ले गए हैं, जिसमें सरकार का दखल कम से कम हो।


साथियों, देश प्रगति तब करता है जब Holistic Vision हो। जब Vision Inclusive हो और Comprehnsive हो। आज हम उस दिशा में आगे बढे हैं जहां State policy driven है, Governace performance driven है, Government accountable है, Democracy participative है। हम न्यू इंडिया के निर्माण के लिए देश में एक Transparent Ecosystem बना रहे हैं जो सरकारी तंत्र पर कम से कम आश्रित हो। इसके लिए नियमों को आसान बनाया जा रहा है, प्रक्रियाओं को आसान बनाया जा रहा है, जहां कानून बदलने की आवश्यकता है, वहां कानून बदले जा रहे हैं। जहां कानून समाप्त करने की आवश्यकता है, वहां कानून समाप्त किए जा रहे हैं।


यहां पर उपस्थित आप में से कुछ को जरूर ये जानकारी होगी कि पिछले तीन वर्ष में भारत सरकार ने 1400 से ज्यादा कानून खत्म कर दिए हैं जो नए कानून बनाए भी जा रहे हैं, उसमें भी इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि वो चीजें और complicate ना करें बल्कि वो simplify करें। सरकारी प्रक्रियाओं के साथ Human to Human Interface जितना कम हो सकता है, वो हम कर रहे हैं।  चाहे Labour Laws की बात हो,  Tax Compliance की बात हो, हम technology का इस्तेमाल करते हुए सारे Process Easy बना रहे हैं।


Friends, We believe, Potential + Policy + Planning + Performance leads to Progress.


इसी सोच का नतीजा है कि आज National Highways बनाने की speed, नई रेल लाइनों के निर्माण की स्पीड, रेल लाइनों के electrification की स्पीड, सरकार द्वारा घर बनाने की स्पीड, Ports पर माल ढुलाई की स्पीड, Solar Power में कपैसिटी addition की स्पीड, पहले के मुकाबले, मैं और भी पचास चीज़ें बता सकता हूँ, पहले के मुकाबले ये दो गुना, तीन गुना हो चुकी है।


साथियों, हमने एक ओर Optimum Utilization of Resources सुनिश्चित किया है, दूसरी ओर  Resource आधारित Development Policies की ओर आगे बढ़े है, और Development Policies आधारित बजट पर जोर दे रहे हैं। पिछले तीन-चार साल में हमारी सरकार ने जो बजट में Reform किया है, बजट से जुड़ी जिस सोच को बदला है, वो पूरे देश में एक नया work culture ही नहीं develop कर रहा, बल्कि सामाजिक-आर्थिक जीवन को भी Transform कर रहा है।


रेल बजट, अब बजट का हिस्सा बन गया है। बजट में पहले Plan, Non-Plan की जो Artificial दीवार थी, वो हमने खत्म कर दी है। बजट का समय भी बदलकर अब एक महीना पहले हो गया है। इन सारे फैसलों की वजह से अब बजट में आवंटित राशि विभागों के पास समय से पहले पहुंच जाती है, योजनाओं पर काम करने के लिए विभागों को अब ज्यादा समय मिल रहा है। मॉनसून की वजह से काम की जो गति धीमी हो जाती थी, उसका प्रभाव भी काफी हद तक अब खत्म हो गया है।


सरकार ने जो structural changes किए हैं, Policy Interventions किए हैं, उसका लाभ देश के किसानों को, गरीबों, दलितों-पिछड़ों को और समाज के वंचित तबकों तक पहुंचे, ये साल दर साल हमारे हर बजट द्वारा सुनिश्चित किया गया है, पुनर्स्थापित किया गया है।

Friends, Our Budget is not limited to outlay, our Budget is not limited to only output, focuse of our Budget is on out-comes. हम 2022 तक Housing for All, 2019 के अंत तक  Power for All , इन सारे क्षेत्रों पर पहले से ही काम कर रहे हैं।

इस वर्ष के बजट में Clean Fuel for All, Health for All, इन दो concepts पर काम और तेज किया गया है। हमने उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारो को मुफ्त गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य 5 करोड़ परिवार से बढ़ाकर 8 करोड़ परिवार कर दिया है। भारत में total परिवारों की संख्‍या करीब-करीब 25 करोड़ है। उसमें से 8 करोड़ परिवार।

ये सिर्फ कुछ  योजनाएं भर नहीं हैं बल्कि ये दिखाती हैं कि हम किस दिशा की तरफ बढ़ रहे हैं। देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के सामाजिक - आर्थिक कल्याण, उसके Social और Financial Inclusion की यह फिलॉसफी हमारे बजट का एक आधारभूत मान्‍यता के रूप में आप अनुभव करते होंगे।  

जनधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन, Skill India, Digital India, मुद्रा योजना, स्टैंड अप इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, जैसी अनेक अनगिनत योजनाएं देश के गरीबों को, निम्‍न–मध्‍यम, मध्‍यम वर्ग को, नौजवानों को, महिलाओं को सशक्त कर रही हैं।

साथियों, हमने Health Care से जुड़े जिस बड़े initiative का ऐलान किया है, वो दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। बड़े-बड़े कॉरपोरेट हाउसेस के लोग यहां हैं, उनका मैनेजमेंट यहां बैठे हुए हैं। आपको पता होगा कि प्राइवेट कंपनियों में किस सैलरी स्लैब तक उस व्यक्ति को पूरे परिवार के लिए 5 लाख रुपए तक का हेल्थ एश्योरेंस मिलता है। आमतौर पर 60-70 हजार से लेकर एक-डेढ़ लाख रुपए की कमाई वाले व्यक्ति को इस ब्रेकेट स्‍थान मिलता है।  

अब ये सरकार ऐसी है कि जिसने हमारी सरकार आयुष्मान भारत योजना के तहत साल भर में एक परिवार को 5 लाख रुपए तक का हेल्थ एश्योरेंस देश के गरीब से गरीब व्यक्ति को देने का निर्णय किया हुआ है। और करीब-करीब 10 करोड़ परिवार, यानी कि 50 करोड़ से अधिक लोगों को इसका लाभ मिलने वाला है।  ये योजना गंभीर बीमारियों की वजह से लोगों को गंभीर आर्थिक संकट की दोहरी मार से भी बचाएगी।·आयुष्मान भारत योजना के तहत ही हमने देश की बड़ी पंचायतों में डेढ़ लाख wellness centres खोलने का भी तय किया है।आप सोच सकते हैं कि ये फैसले देश के Health Care system को किस तरह बदल डालेंगे। ये योजना देश में affordable healthcare institutions, नए doctors, नए पैरा-मेडिकल स्टाफ, Health Care से जुड़े हर सेक्टर के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी।

देश में Education Infrastructure को मजबूत करने के लिए भी हमने एक नया Initiative शुरू किया है। इसके तहत हमारी सरकार अगले चार साल में देश के Education System को सुधारने के लिए एक लाख करोड़ रुपए की योजना खर्च करने की बना करके आगे बढ़ रही है।

इसी तरह देश के नौजवानों में Self Employment औऱ विशेषकर MSME सेक्टर में काम कर रहे उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए हम मुद्रा योजना का दायरा बढ़ा रहे हैं। जब से ये योजना शुरू हुई है, तब से लेकर अब तक लगभग साढ़े दस करोड़ लोन हमारे यहां स्वीकृत किए गए  हैं। लोगों को बिना गारंटी अब तक 4 लाख 60 हजार करोड़ रुपए का कर्ज दिया जा चुका है। इस वर्ष के बजट में भी हमने 3 लाख करोड़ रुपए का मुद्रा लोन देना इसका निर्णय किया है।

ऐसे अलग-अलग मिशन, देश के गरीब, देश के मध्यम वर्ग में Ease of living को बढ़ावा दे रहे हैं। ये Ease of living जितनी बढ़ेगी, उतने ही लोग empower भी होंगे। जितना लोग empower होंगे, उतना ही हमारा social और economic development तेज होगा।

जैसे मैं देश के Rural सेक्टर की बात करूं तो इस साल के बजट में हमने Agriculture, Rural Infrastructure के विकास के लिए 14 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करना तय किया है। ये राशि farming activities पर तो खर्च होगी ही, इससे गांवों में 3 लाख किलोमीटर से ज्यादा सड़कें बनेंगी, 51 लाख नए घर बनेंगे, लगभग दो करोड़ नए Toilets बनाए जाएंगे, पौने दो करोड़ गरीब घरों में बिजली कनेक्शन दिया जाएगा।

ये सारे प्रयास agriculture growth तो बढ़ाएंगे ही, Rural सेक्टर में employment की लाखों संभावनाएं भी पैदा करेंगे। इस साल हमने देश के इंफ्रास्ट्रक्टर पर खर्च का बजट भी एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा बढ़ाया है। नए पुल, नई सड़कें, नई मेट्रो, नए एयरपोर्ट, मुंबई जैसे Maximum City की Maximum Aspirations से जुड़े हुए हैं और खासकर देश के मिडिल क्लास की Aspirations को एड्रेस करते हैं।

साथियों, आज के इस Global World में, Disruptions और Discontent के दौर में हमें वर्तमान के साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए आगे का रास्ता बनाना होगा और हम सबको मिलकर करना होगा। जब हम सभी, देश की आवश्यकताओं को समझते हुए कार्य करेंगे, देश के लोगों की Aspirations को समझते हुए काम करेंगे, तभी न्यू इंडिया के अपने संकल्प को भी पूरा कर पाएंगे। तभी भारत के विशाल Demographic Dividend के साथ हम न्याय कर पाएंगे।

मुझे पूरी उम्मीद है कि महाराष्ट्र सरकार, यहां की ब्यूरोक्रेसी, यहां के करोड़ों नागरिक, अपने-अपने संकल्प को पूरा करेंगे और समय रहते पूरा करेंगे।

आखिर में, Magnetic Maharashtra के charismatic जनता जनार्दन को, यहां के परिश्रमी लोगों को,उद्यमियों को, उनका आभार व्यक्त करते हुए मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। फिर एक बार इस समारोह को हृदय से बहुत-बहुत शुभकमानाएं देता हूं। देश-दुनिया से आए हुए सभी महानुभावों को विश्‍वास दिलाता हूं कि भारत सरकार, राज्‍य सरकारों के साथ जुड़ करके राष्‍ट्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। जो दुनिया की 1/6th population का भला होगा तो दुनिया का कितना भला होगा, जितना अंदाजा आप भलीभांति लगा सकते हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !!!



अतुल तिवारी / अभिनव प्रसून / निर्मल शर्मा


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Shri R.K. Singh inaugurates ‘Indian Power Stations 2018’ - International Conference on Operations and Maintenance

Power Minister exhorts NTPC to become India’s power sector multinational, set up plants overseas Plans to send teams to neighbouring countries to assess power demand, explore export opportunities

Union Minister of State (IC) for Power and New and Renewable Energy, Shri R.K. Singh inaugurated the ‘Indian Power Stations 2018’ - three-day International Conference on Operations and Maintenance, here today. The Minister exhorted the NTPC to become India’s power sector multinational by setting up power plants in other Nations and become world’s largest power producer. Shri Singh also added that there was huge opportunity to export cheap power to neighbouring countries which will be beneficial for the entire region.

The Minister said that neighbouring countries like Sri Lanka, Myanmar, Nepal and Bangladesh are viable markets for export of power, where per unit cost of electricity is very high. He added that Ministry of Power would explore the idea of sending teams to these countries to assess the demand for export of power.

Talking about achieving Government’s aim of ‘24x7 Power for All’ Shri Singh said, “If you look at the entire power sector, the demand has been suppressed because not everyone is connected. We have just started taking-off and going to enter double digit growth. What we see as excess capacity today may not turn out to be enough if we unlock that demand. The unlocking of demand will come but with some constraints. We don’t have a shortage of coal but we need to put in place mechanisms to get coal from underground to over ground and to the power stations and we need to do that as soon as possible”.

Further, the Minister added that when all power plants in the country would run at 70-80 per cent of PLF, there would be no stressed assets. The problem of stressed assets is there because first, the power plants are not able to get adequate coal and secondly, demand needs to be unlocked.

Sharing his views on the status of renewable energy in the country, Shri Singh said that the progressive realization of low prices of renewable energy is sending wrong signals to the market. The Minister said, “The consumers and institutional companies need to understand that this cheap renewable power by itself is not sufficient and need rebalancing with support of steady power. This message we need to get across to the people and to DISCOMs”.

Other dignitaries present on the occasion included Shri Ajay Kumar Bhalla, Secretary Power, along with other senior officers of the Ministry and NTPC.




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Indian Railways’ Water Policy has been formulated with the objective is to improve water use efficiency by effective demand and supply management, installing water efficient systems and setting up Water Recycling Plants on railway land.

The following steps have been envisaged in the Water Policy for efficient water management:

  • Upgrading water supply system.
  • Introduction of Automatic Valves.
  • Mandatory provision of Solar water heaters.
  • Rain Water Harvesting (RWH).
  • Reviving old water bodies on railway land.
  • Water Recycling Plants on BOOT basis.
  • Use of water efficient fittings.
  • Water Audit.

 This information was given by the Minister of State for Railways Shri Rajen Gohain in a written reply to a question in Lok Sabha today.




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S. No.

Name of MoUs/Agreements

Description of MoU/ Agreement

Indian side

Iranian side


Agreement for the Avoidance of Double Taxation and the Prevention of Fiscal Evasion with respect to taxes on Income.

To avoid burden of double taxation between the two countries in order to promote flow of investment and services.

Smt. Sushma Swaraj,External Affairs Minister

Dr. Masoud Karbasian, Minister of Economic Affairs and Finance


MoU on Exemption from Visa requirement for holders of Diplomatic Passports.

Waiver of requirement of visa for the travel of diplomatic passport holders in each country.

Smt. Sushma Swaraj,External Affairs Minister

Dr. Mohammad Javad Zarif, Minister of Foreign Affairs


Exchange of Instrument of Ratification of Extradition Treaty.

It brings into effect the Extradition Treaty signed between India and Iran in 2008.

Smt. Sushma Swaraj,External Affairs Minister

Dr. Mohammad Javad Zarif, Minister of Foreign Affairs


Lease Contract for Shahid Beheshti Port- Phase 1 of Chabahar during Interim Period between Port and Maritime Organization (PMO), Iran and India Ports Global Limited (IPGL).

Leasing of a part of the area of the multipurpose and container Terminal for a term of one and half solar year (18 months) to take over operation of existing port facilities.

Shri Nitin Gadkari, Minister of Shipping

Dr. Abbas Akhundi, Minister of Road and Urban Development


MoU on Cooperation in the field of Traditional Systems of Medicine.

To develop and strengthen cooperation in traditional systems of medicine including regulation of teaching, practice, drugs and drugless therapies; facilitating supply of all medicine materials and documents; exchange of experts for training of practitioners, paramedics, scientists, teaching professionals and students and accommodating them in institutions for research, educational and training programmes; mutual recognition of pharmacopoeias and formularies; setting up of academic chairs; provision of scholarships; recognition of traditional preparations on reciprocity basis; permission to practice on reciprocity basis.

Shri Vijay Gokhale, Foreign Secretary

H.E. Gholamreza Ansari, Ambassador of Iran


MoU on the establishment of an Expert Group on Trade Remedy Measures to promote cooperation in areas of mutual interest.

It aims to establish a framework of cooperation in the area of Trade Remedial Measures viz. anti-dumping and counterveiling duty.

Smt. Rita Teotia, Secretary (Commerce)

Dr. Mohammad Khazaei, Deputy Minister of Economic Affairs and Finance


MoU on Cooperation in the field of Agriculture and Allied Sectors.

Bilateral cooperation in the field of agriculture and allied sector including joint activities, programmes,exchange of information and personnel; cooperation in the field of agricultural crops, agricultural extension, horticulture, machinery, post harvest technology, plant quarantine measures, credit and cooperation, soil conservation, seed technology, livestock improvement, dairy development.

Shri S K Pattanayak, Secretary (Agriculture)

Dr. Mohammad Khazaei, Deputy Minister of Economic Affairs and Finance


MoU on Cooperation in the field of Health and Medicine.

To establish comprehensive inter-ministerial and inter-institutional cooperation between two sides including pooling of technical, scientific, financial and human resources; upgrading the quality and reach of human, material and infrastructural resources in healthcare, medical education, research and training; exchanging experience in training of medical doctors and other health professionals; assistance in development of human resources and setting up of health care facilities; regulation of pharmaceuticals, medical devices and cosmetics and exchange of information thereon; cooperation in medical research; cooperating in public health, Sustainable Development Goals (SDGs) and international health.

Shri Vijay Gokhale, Foreign Secretary

H.E. Gholamreza Ansari, Ambassador of Iran


MoU on Postal Cooperation.

Cooperation between the two postal agencies including exchange of experience, knowledge and technology in e-commerce/logistics services; cooperation on philately; establishment of working group of experts; feasibility studies on using air and surface transit capacities of both countries.

Shree Anant Narayan Nanda, Secretary (Post)

H.E. Gholamreza Ansari, Ambassador of Iran

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It is heartening to note that the recent budget announcements have once again reiterated the Present Government’s intent and resolve to give full support to Science and Technology endeavours for the cause of national development.

Ministry of Science & Technology and Earth Sciences cover a very large canvas of R&D from deep oceans to mysteries of universe. The range personnel in these Ministries/ Departments encompasses grassroots innovators to top class of scientists. Their activities impact right from a farmer in a remote corner of the country to sophisticated industries such as aerospace.

To cater to such a large audience, it is necessary that adequate investments are made in scientific research, innovation and technology development. Present Government has consciously provided higher allocations for Science, Technology and Innovation promotion. 

Budget allocation for Department of Science and Technology during last 5 years was Rs.19764 cr, which is a whopping 90% increase over the preceding 5 years (2009-10 to 2013-14). Similarly, there was an increase of 65% for Department of  Biotechnology;  almost 43% increase for Council of Scientific and Industrial Research; and 26% increase for Ministry of Earth Sciences during the last 5 years.   The upward trend continued for budget allocation for 2018-19.

During the last 3-4 years our activities  of Ministries of Science & Technology and Earth Sciences have been realigned and now there is a judicious mix of fundamental science  and application science. This year’s budget announcement on Mission for Cyber-Physical-Systems is one such example of application science.  Mission projects on Super computing; Aroma; Sickle cell anemia; and Biopharma are  some illustrative examples of application and solution science initiatives. The list of such initiatives is very large.

Innovation and start-up activities have received a big support during this period. Business incubation facilities have almost been doubled. During 2018-19 itself, 15 new Biotechnology Incubators and 15-20 new Technology Business Incubators will be established to incubate start-ups. Biotechnology Industry Research Assistance Council (BIRAC) alone would support 3000 additional start-ups next year.

CSIR, amongst 100 top organisations in the world, spearheads the industry relevant research. The R&D efforts of CSIR are aligned to the needs of the domestic industry and the social needs of the nation.  They cater to the initiatives such as Make in India; Swachch Bharat; Clean Ganga; Swastha Bharat; Smart Cities; Smart Villages; Clean, efficient, affordable and renewable energy technology solutions; and Innovate in India etc. in a significant way. 

Any S&T intervention which facilitates farmers and farming activities to improve crop productivity makes a huge impact on rural economy. Agrometeorological advisories to farmers is one such mechanism which benefits them in their day to day farming operations.  During 2018-19, these advisories will reach 50 million farmers from the present 24 million. ‘Biotech Kisan’ is another such initiative which is assisting farmers in 15 agro-climatic zones. Similarly, thousands of farmers are getting benefitted under Aroma Mission for cultivation of aromatic plants.

Pt Deen Dayal Upadhyay Vigyan Gram Sankul Pariyojana for integrated development of cluster of villages in  Uttarakhand through S&T interventions utilising local resources and local skills to provide opportunities of better livelihood at the local level is another example of a project targeted to benefit the common man.

Development of clean energy options and providing water related solutions and demonstration and deployment of other successful technology solutions will be pursued vigorously during the next financial year.

The way the present Government has made investments in Science  and Technology endeavours and the new thrust given to several new initiatives which directly benefit  the common man  by the Ministry of S&T and Earth Sciences would translate such measures into prosperity and general welfare of the masses.



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आदरणीय अध्‍यक्ष महोदया जी, माननीय राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण पर उन्‍हें आभार व्‍यक्‍त करने के लिए मैं सदन में आपके बीच आभार प्रस्‍ताव का समर्थन करते हुए कुछ बातें जरूर कहना चाहूंगा। कल सदन में राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण के धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर कई मान्‍य  सदस्‍यों ने अपने विचार वयक्‍त किए। श्रीमान मल्लिका अुर्जन जी, श्रीमान मोहम्‍मद सलीम जी, श्रीमान विनोद कुमार जी, श्रीमान नरसिम्‍हन धोटा जी, श्री तारिक अनवर जी, श्री प्रेम सिंह जी, श्री अनवर रजा जी, जयप्रकाश नारायण यादव जी, कल्‍याण बैनर्जी, श्री पी. वेणु गोपाल, आनंदराव अडसुल जी, आर. के. भारती मोहन जी, करीब 34 मान्‍य सदस्‍यों ने अपने विचार व्‍यक्‍त किए। विस्‍तार से चर्चा हुई। किसी ने पक्ष में कहा, किसी ने विपक्ष में कहा। लेकिन यह सार्थक चर्चा इस सदन में हुई और राष्‍ट्रपति जी का भाषण किसी दल का नहीं होता है। देश की आशा-आकांक्षाओं की अभिव्‍यक्ति का और उस दिशा में हो रहे कार्य का एक आलेख होता है। और उस दृष्टि से राष्‍ट्रपति जी के भाषण का सम्‍मान होना चाहिए। सिर्फ विरोध के खातिर विरोध करना कितना उचित है।

सभापति महोदया जी, हमारे देश में राज्‍यों की रचना आदरणीय अटल बिहार वाजपेयी जी ने भी की थी। तीन नये राज्‍यों का निर्माण हुआ था और उन तीन राज्‍यों के निर्माण में चाहे उत्‍तर प्रदेश में से उत्‍तराखंड बना हो, मध्‍य प्रदेश में से छत्‍तीसगढ़ बना हो, बिहार में से झारखंड बना हो, लेकिन उस सरकार की दीर्घ दृष्टि थी कि कोई भी समस्‍या के बिना तीनों राज्‍य अलग होते ही अगर जो भी बंटवारा करना था तो बंटवारा, अफसरों के तबादले करने थे तो अफसरों के तबादले सारी चीजें smoothly हुई। नेतृत्‍व अगर दीर्घ द्रष्‍टया हो, राजनीतिक स्‍वार्थ की हड़बड़ाहट में निर्णय नहीं होते हो, तो कितने स्‍वस्‍थ निर्णय होते हैं। इसका उदाहरण अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जो तीन राज्‍यों का निर्माण किया था, आज देश अनुभव कर रहा है। आपके चरित्र में हैं जब भारत का विभाजन किया आपने, देश के टुकड़े किए और जो जहर बोया। आज आजादी के 70 साल के बाद एक दिन ऐसा नहीं जाता है कि आपके उस पाप की सजा सवा सौ करोड़ हिंदुस्‍तानी न भुगत रहे हो।

आपने देश के टुकड़े किए वो भी उस तरीके से किए। आपने चुनाव को ध्‍यान में रखते हुए हड़बड़ी में संसद के दरवाजे बंद करके सदन ऑर्डर में नहीं था, तब भी आंध्र के लोगों की भावनाओं का आदर किए बिना तेलंगाना बनाने के पक्ष में हम भी थे। तेलंगाना आगे बढ़े उसके पक्ष में आज भी हम है। लेकिन आंध्र के साथ उस दिन आपने जो बीज बोये, आपने जो चुनाव के लिए हड़बड़ी में किया। यह उसी का नतीजा है कि आज चार साल के बाद भी समस्‍याएं सुलगती रहती हैं और इसलिए आपको यह प्रकार की चीजें शोभा नहीं देती।

सभापति महोदया जी, कल मैं कांग्रेस पार्टी के नेता श्रीमान खड़गे जी का भाषण सुन रहा था। मैं यह समझ नहीं पा रहा था कि वे ट्रेजरी बेंच को संबोधित कर रहे थे, कर्नाटक के लोगों को संबोधित कर रहे थे कि अपने ही दल के नीति निर्धारकों को खुश करने का प्रयास कर रहे थे। और जब उन्‍होंने कल बशीर बद्र की शायरी से शुरू किया। खड़गे जी ने बशीर बद्र जी की शायरी सुनाई। और मैं आशा करता हूं कि उन्‍होंने जो शायरी सुनाई है, वो कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री महोदय ने जरूरी सुनी होगी। कल उस शायरी में उन्‍होंने कहा कि –

‘दुश्‍मनी जमकर करो, लेकिन यह गुंजाइश रहे

जब कभी हम दोस्‍त हो जाएं, तो शर्मिंदा न हो’

मैं जरूरत मानता हूं कि कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री जी ने आपकी यह गुहार सुन ली होगी, लेकिन श्रीमान खड़गे जी जिस बशीर बद्र की शायरी का आपने जिक्र किया, अच्‍छा होता उस शायरी में जो शब्‍द आप बोल रहे हैं उसके बिल्‍कुल पहले वाली लाइन उसको भी अगर याद कर लेते तो शायद इस देश को यह पता जरूर चलता कि आप कहां खड़े हैं। उसी शायरी में बशीर बद्र जी ने आगे कहा है –

‘जी चाहता है सच बोले, जी बहुत चाहता है सच बोले,

क्‍या करे हौसला नहीं होता।’

मैं नहीं जानता हूं कि कर्नाटक के चुनाव के बाद खड़गे जी उस सही जगहें पर होंगे कि नहीं होंगे और इसलिए एक प्रकार से यह farewell speech भी उनकी हो सकती है। और इसलिए आमतौर पर सदन में जब पहली बार कोई सदस्‍य बोलते हैं तो हर कोई सम्‍मान से  और उसी प्रकार से जो farewell की speech होती है, वो भी करीब-करीब सम्‍मान से देखी जाती है। अच्‍छा होता कल कुछ माननीय सदस्‍यों ने संयम बरता होता और आदरणीय खड़गे जी की बात को उसी सम्‍मान के साथ सुना होता, तो अच्‍छा होता। लोकतंत्र के लिए बहुत आवश्‍यक है। विरोध करने का हक है, लेकिन सदन को मान में लेने का हक नहीं है।

कल अध्‍यक्ष महोदया, मैं देख रहा हूं कि जब भी हमारे विपक्ष में कुछ लोग हमारी किसी बात की आलोचना करने जाते हैं, तो तथ्‍य तो कम होते हैं। लेकिन हमारे जमाने में ऐसा था, हमारे जमाने में ऐसा किया था, हम यह करते थे ज्‍यादातर उसी कैसेट को बजाया जाता है। लेकिन यह न भूलें कि भारत आजाद हुआ, उसके बाद भी जो देश आजाद हुए वो हमसे भी तेज गति से काफी आगे बढ़ चुके हैं। हम नहीं बढ़ पाए मानना पड़ेंगा और आपने मां भारती के टुकड़े कर दिए उसके बावजूद भी यह देश आपके साथ रहा था। आप उस जमाने में देश पर राज कर रहे थे। प्रारंभिक तीन-चार दशक विपक्ष का एकमात्र से नाममात्र का विपक्ष था। वो समय था, जब मीडिया का व्‍याप भी बहुत कम था और जो था वो भी ज्‍यादातर देश का भला होगा इस आशा से शासन के साथ चलता था। रेडियो पूरी तरह आप ही के गीत गाता था और कोई स्‍वर वहां सुनाई नहीं देता था। और बाद में जब टीवी आया तो वो टीवी भी आप ही को पूरी तरह समर्पित था। उस समय न्‍यायपालिका में भी judiciary की top position पर भी नियुक्तियां कांग्रेस पार्टी करती थी। पार्टी के द्वारा तय होता था यानि इतनी luxury आपको। उस समय कोर्ट में न कोई पीआईएल होता था न कोई NGO की ऐसी भरमार होती थी। आप जिन विचारों से पले-बढ़े हो, वैसा ही माहौल उस समय देश में उपको उपलब्‍ध था।  विरोध का नामो-निशान नहीं था। पंचायत से पार्लियामेंट तक आप ही का झंडा फहर रहा था, लेकिन आपने पूरा समय एक परिवार के गीतगाने में खपा दिया। देश के इतिहास को भुला करके एक ही परिवार को देश याद रखें, सारी शक्ति उसी में लगाई। उस समय देश का जज्‍बा आजादी के बाद के दिन थे। देश को आगे ले जाने का जज्‍बा था, आपने कुछ जिम्‍मेदारी के साथ काम किया होता, तो एक देश की जनता में सामर्थ्‍य था देश को कहां से कहां तक पहुंचा देते। लेकिन आप अपनी ही धुन बजाते रहे। और यह मानना पड़ेगा कि आपने सही दिशा रखी होती, सही नीतियां बनाई होती, अगर नियत साफ होती, तो यह देश आज जहां है, उससे कई गुना आगे और अच्‍छा होता। इसको इंकार नहीं कर सकते। यह दुर्भाग्‍य रहा है देश का कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं को यही लगता है कि भारत नाम के देश का जन्‍म 15 अगस्‍त, 1947 को हुआ। जैसे इसके पहले देश था ही नहीं। और कल मैं हैरान था, इसको मैं अहंकार कहूं, या नसमझी कहूं, या वर्षा ऋतु के समय अपनी कुर्सी बचाने का प्रयास कहूं। जब यह कहा गया कि देश को नेहरू ने लोकतंत्र  दिया, देश को कांग्रेस ने लोकतंत्र दिया। अरे खड़गे साहब, कुछ तो कम करो। जरा मैं पूछना चाहता हूं आप लोकतंत्र की बा करते हैं। आपको पता होगा यह हमारा देश, जब आप जो लोकतंत्र की बात  करते हैं, हमारा देश जब लिच्‍छवी साम्राज्‍य था, जब बुध परंपराएं थी, तब भी हमारे देश में लोकतंत्र की गूंज थी। यह कांग्रेस और नेहरू जी ने लोकतंत्र नहीं दिया।

बौद्ध संघ एक ऐसी व्‍यवस्‍था थी जो चर्चा, विचार विमर्श और वोटिंग के आधार पर निर्णय करने की प्रक्रिया चलाता था और श्रीमान खड़गे जी, आप तो कर्नाटक से आते हो कम से कम एक परिवार की भक्ति करके कर्नाटक के चुनाव के बाद शायद आपके यहां बैठने की जगह बची रहे, लेकिन कम से कम जगत गुरू बश्‍वेश्‍वर जी का तो अपमान मत करो। आपको पता होना चाहिए, आप कर्नाटक से आते हो कि जगत गुरू बश्‍वेश्‍वर थे, जिन्‍होंने उस जमाने में अुनभव मंडपम नाम की व्‍यवस्‍था की, 12वीं शताब्‍दी में, और गांव के सारे निर्णय लोकतांत्रिक तरीके से होता था। और इतना ही नहीं women empowerment का काम हुआ था उस सदन के, उस सभा के अंदर महिलाओं का होना अनिवार्य हुआ करता था। यह जगत गुरू बश्‍वेश्‍वर जी के कालखंड में लोकतंत्र को प्रस्‍तावित करने का काम 12वीं शताब्‍दी में इस देश हुआ था। लोकतंत्र हमारी रगों में हैं, हमारी परंपरा में है। और बिहार के अंदर इतिहास गवाह है लिच्‍छवी साम्राज्‍य के समय इस प्रकार से हमारे यहां, अगर हम प्राचीन इतिहास की तरह गौर करे, तो हमारे यहां गणराज्‍य की व्‍यवस्‍थाएं हुआ करती थी, ढ़ाई हजार साल पहले,  यह भी लोकतंत्र की परंपरा थी। सहमति और असहमति को हमारे यहां मान्‍यता थी। आप लोकतंत्र की बात करते हो, श्रीमान मनमोहन जी की सरकार में मंत्री रहे हुए और आप ही के पार्टी के नेता उन्‍होंने अभी-अभी जब आपकी पार्टी के भीतर चुनाव चल रहा था, तो उन्‍होंने मीडिया को क्‍या कहा था। उन्‍होंने कहा था जहांगीर की जगह पर शाहजहां आए, शाहजहां की जगह औरंगजैब आए। क्‍या वहां चुनाव हुआ था क्‍या? तो हमारे यहां भी आ गए। आप लोकतंत्र की बात करते हो। आप लोकतंत्र की चर्चा करते हो। मैं जरा पूछना चाहता हूं, वो कौन सा लोकतंत्र की चर्चा करते हैं, जब आपके पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमान राजीव गांधी हैदराबाद के एयरपोर्ट पर उतरते हैं। वहां पर आप ही के पार्टी के चुने हुए मुख्‍यमंत्री, schedule caste के मुख्‍यमंत्री एयरपोर्ट पर receive करने आए थे और लोकतंत्र में विश्‍वास की बातें करने वाले लोग जिस नेहरू जी के नाम पर आप लोकतंत्र की सारी परंपरा समर्पित कर रहे हो। श्रीमान राजीव गांधी ने हैदराबाद एयरपोर्ट पर उतर करके एक दलित मुख्‍यमंत्री उनको खुलेआम अप‍मानित किया था। एक चुने हुए जनप्रतिनिधि मुख्‍यमंत्री टी अंजैया का अपमान किया आप लोकतंत्र की बातें करते हो, अरे आप लोकतंत्र की चर्चा करते हो तब सवाल यह उठता है और यह तेलगूदेशम पार्टी यह एंटी रामाराव उस अपमान की आग में से पैदा हुए थे। टी अंजैया का अपमान हुआ उनका सम्‍मान करने के लिए रामाराव को अपना फिल्‍म क्षेत्र छोड़ करके आंध्र की जनता की सेवा के लिए मैदान में आना पड़ा।

आप लोकतंत्र की बात समझा रहे हो। इस देश में 90 बार, 90 से अधिक बार धारा-356 का दुरूपयोग करते हुए राज्‍य सरकारों को उन राज्‍यों में उभरती हुई पार्टियों को आपने उखाड़  के फैंक दिया। आपने पंजाब में अकाली दल के साथ क्‍या किया? आपने तमिलनाडु में क्‍या किया? आपने केरल में क्‍या किया? इस देश के लोकतंत्र को आपने पनपने नहीं दिया। आप अपने परिवार के लोकतंत्र को लोकतंत्र मानते हो। और देश को आप गुमराह कर रहे हो। इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी का लोकतंत्र, जब आत्‍मा की आवाज़ उठती है, तो उनका लोकतंत्र दबोच जाता है। आप जानते हैं कांग्रेस पार्टी ने राष्‍ट्रपति के उम्‍मीदवार के रूप में नीलम संजीव रेड्डी को पंसद किया था। और रातो-रात उनका पीठ पर छुरा भौंक दिया गया। अतिकृत उम्‍मीदवार का पराजित कर दिया गया। और यह भी तो देखिए इतफाक से वे भी आंध्र से आते थे। टी अंजैया के साथ किया आपने संजीव रेड्डी के साथ किया। आप लोकतंत्र की बात बताते हो? इतना ही नहीं अभी का डॉक्‍टर मनमोहन सिंह जी इस देश के प्रधानमंत्री कैबिनेट का निर्णय किया लोकतंत्र की महत्‍वपूर्ण संस्‍था संविधान के द्वारा बनी हुई संस्‍था आप ही की पार्टी की सरकार और आपकी पार्टी के एक पदाधिकारी पत्रकार वार्ता बुला करके कैबिनेट के निर्णय को प्रेस के सामने टुकड़े कर दे। आपके मुंह में लोकतंत्र शोभा नहीं देता है। और इसलिए कृपा करके आप हमें लोकतंत्र के पाठ मत पढ़ाइये।

मैं जरा एक और इतिहास की एक बात आज बता रहा हूं। क्‍या सत्‍य नहीं है देश में कांग्रेस में नेतृत्‍व करने के लिए चुनाव हुआ । 15 कांग्रेस कमेटियां, उसमें से 12 कांग्रेस कमेटियों ने सरदार वल्‍लभ भाई पटेल को चुना था। तीन लोगों ने नोटा किया था। किसी को भी वोट नहीं देने का निर्णय किया था। उसके बावजूद नेतृत्‍व सरदार वल्‍लभ भाई पटेल को नहीं दिया गया। वो कौन सा लोकतंत्र था? पंडित नेहरू को बिठा दिया गया। अगर देश के पहले प्रधानमंत्री सरदार वल्‍लभ भाई पटेल होते, तो मेरा कश्‍मीर का यह हिस्‍सा आज पाकिस्‍तान के पास न होता।

अभी दिसंबर में क्‍या कांग्रेस पार्टी के अध्‍यक्ष का चुनाव था या ताजपोशी थी। आप ही के पार्टी के नौजवान ने आवाज़ उठाई, वो अपना उम्‍मीदवारी पत्र भरना चाहता था। आपने उसको भी रोक दिया। आप लोकतंत्र की बातें करते हो। मैं जानता हूं यह आवाज़ दबाने के लिए इतनी कोशिश नाकाम रहने वाली है। सुनने की हिम्‍मत चाहिए, और इसलिए अध्‍यक्ष महोदया, हमारी सरकार की विशेषता है ऐसे एक वर्क कल्‍चर को लाए, जिस वर्क कल्‍चर में सिर्फ घोषणाएं करके अखबार की सुर्खियों में छा जाना, सिर्फ योजनाएं घोषित करके जनता के आंख में धूल झोंक देना, यह हमारा कल्‍चर नहीं है।  हम उन चीजों को हाथ लगाते हैं जिसको पूरा करने का प्रयास हो। और जो अच्‍छी चीजें हैं वो किसी भी सरकार की, किसी की भी क्‍यों न हो अगर वो अटकी है, देश का नुकसान हो रहा है, तो उसको ठीक-ठाक करके पूरा करने का प्रयास करते हैं, क्‍योंकि लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती हैं, देश बना रहता है और उस सिद्धांत को हम मानने वाले व्‍यक्ति हैं। क्‍या यह सत्‍य नहीं हैं। यही मुलाजिम, यही फाइलें, यही कार्यशैली और क्‍या कारण था कि पिछली सरकार में हर रोज 11 किलोमीटर नेशनल हाईवे बनते थे। आज एक दिन में 22 किलोमीटर नेशनल हाईवे बने हैं। रोड आप भी बनाते हैं, रोड हम भी बनाते हैं। पिछली सरकार के आखिरी तीन सालों में 80 हजार किलोमीटर सड़कें बनी। हमारी सरकार के तीन साल में एक लाख 20 हजार किलोमीटर सड़के बनी। पिछली सरकार के आखिरी तीन वर्षों में लगभग 1100 किलोमीटर नई रेल लाइन का निर्माण हुआ। सरकार के इन तीन वर्षों में 2100 किलोमीटर हुआ। पिछली सरकार के आखिरी तीन वर्षों में ढाई हजार किलोमीटर रेल लाइन का बिजलीकरण हुआ। इस सरकार के तीन सालों में चार हजार तीन सौ किलोमीटर से ज्‍यादा काम हुआ। 2011 के बाद पिछली सरकार 2014 तक आप फिर कहेंगे, यह तो योजना हमारी थी, यह तो कल्‍पना हमारी थी, इसकी क्रेडिट तो हमारी है, यह गीत गाएंगे, सच्‍चाई क्‍या है? ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, आपके कार्य करने के तरीके क्‍या थे? जब तक रिश्‍तेदारों का मेल न बैठे या अपनों का मेल न बैठे, गाड़ी आगे चलती नहीं थी। 2011 के बाद से 2014 तक आपने सिर्फ 59 पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर पहुंचाया। 2011 से 2014 तीन साल। हमने आने के बाद इतने कम समय में एक लाख से अधिक पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पहुंचा दिया। कहां तीन साल में 60 से भी कम गांव और कहां तीन में एक लाख से भी ज्‍यादा गांव, कोई हिसाब ही नहीं है जी। और इसलिए पिछली सरकार शहरी आवास योजना 939 शहरों में लागू किए थे। आज प्रधानमंत्री आवास योजना urban 4320 शहरों में लागू की थी। आप एक हजार से भी कम हम 4000 से भी ज्‍यादा। पिछली सरकार के आखिरी तीन वर्षों में कुल 12 हजार मेगावाट की renewable energy की नई क्षमता जोड़ी गई। इस सरकार के तीन सालों में 22 हजार मेगावाट से भी ज्‍यादा जोड़ी गई। Shipping Industry कार्गो हेंडलिंग में आपके समय negative growth था। इस सरकार ने तीन साल में 11 प्रतिशत से ज्‍यादा growth  करके दिखाया है। अगर आप जमीन से जुड़े होते, तो शायद आपकी हालात न होती। मुझे अच्‍छा लगा हमारे खड़गे जी ने, दो चीजें एक तो रेलवे और दूसरा कर्नाटक और खड़गे जी का एकदम सीना फूल जाता है। आपने बीदर कलबुर्गी रेल लाइन का जिक्र किया। जरा देश को इस सच्‍चाई का पता होना चाहिए। यह बात कांग्रेस के मुंह से कभी किसी ने सुनी नहीं होगी, कभी नहीं बोले होंगे। उद्घाटन समारोह में भी नहीं बोले होंगे, शिलान्‍यास में भी नहीं बोले होंगे। सत्‍य स्‍वीकार करिये कि यह बीदर कलबुर्गी 110 किलोमीटर की नई रेल लाइन का प्रोजेक्‍ट अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंजूर हुआ था। और 2013 तक आपकी सरकार रही, आप स्‍वयं रेल मंत्री रहे यह आप ही के parliamentary Constituency का इलाका है और उसके बावजूद भी इतने सालों में, अटल जी की सरकार के बाद कितने साल हुए अंदाज लगाइये सिर्फ 37 किलोमीटर का काम हुआ, 37 किलोमीटर। और वो काम भी तब हुआ जब येदियुरप्‍पा जी मुख्‍यमंत्री थे और उन्‍होंने initiative लिया। उन्‍होंने भारत सरकार ने जो मांगा देने के लिए सहमति दे दी। तब जाकर आपकी सरकार ने अटल जी के सपने को आगे बढ़ाने का काम चालू किया। और वो भी जब चुनाव आया तो आपको लगा कि यह रेल चल पड़े तो अच्‍छा होगा। 110 किलोमीटर होनी थी साढ़े तीस किलोमीटर के टुकड़े पर जा करके झंडी फहरा करके आ गए। और हमने आ करके इतने कम समय में 72 किलोमीटर का जो बाकी काम था पूरा किया। और यह हमने नहीं सोचा कि विपक्ष के नेता की  parliamentary Constituency है इसको अभी गड्ढे में डालो देखा जाएगा। ऐसा पाप हम नहीं करते। आपका इलाका था, लेकिन काम देश का था। हमने देश का काम मान करके उसको पूरा किया। और उस पूरी योजना का लोकार्पण मैंने किया तो भी आपको दर्द हो रहा है। इस दर्द की दवा शायद देश की जनता ने बहुत पहले कर दी है।

अध्‍यक्ष महोदया, दूसरी एक चर्चा कर रहे हैं बाड़मेर की रिफाइनरी की। चुनाव प्राप्‍त करने के लिए, चुनाव के पहले पत्‍थर पर नाम जड़ जाएगा तो गाड़ी चल जाएगी। आपने बाड़मेर रिफाइनरी पर जाकर पत्‍थर जड़ लिए, नाम लिखवा दिया, लेकिन जब हम आ करके कागजात देखे तो जो वो शिलान्‍यास हुआ था रिफाइनरी का वो सारा का सारा कागज़ पर था जमीन पर न मंजूरी थी, न जमीन थी, न भारत सरकार के साथ कोई Final Agreement था। और चुनाव को ध्‍यान में रखते हुए आपने वहां भी पत्‍थर जड़ दिया। आपकी गलतियों को ठीक करते उस योजना को सही स्‍वरूप देने में भारत सरकार को, राजस्‍थान सरकार को इतनी माथापच्‍ची करनी पड़ी, तब बड़ी मुश्किल से उसको नि‍काल पाए और आज उस काम को प्रारंभ कर दिया है।

असम में एक धोला सादिया ब्रिज, यह धोला सादिया ब्रिज जब हमने उद्घाटन किया तो जरा कुछ लोगों को तकलीफ हो गई और कह दिया यह तो हमारा था बड़ा आसान है। यह कभी नहीं बोले हैं जब उस ब्रिज का काम आगे बढ़ रहा था, कभी सदन में सवाल उठे हैं, कभी यह कहने की ईमानदारी नहीं दिखाई कि यह काम भी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में निर्णित हुआ था और वो भी हमारे बीजेपी के एक विधायक उन्‍होंने विस्‍तार से अध्‍ययन करके मांग की थी और अटल जी ने उस मांग को माना था और उसमें से यह बना था। और 2014 में हमारी सरकार बनने के बाद नॉर्थ ईस्‍ट उत्‍तर पर्व के इलाकों को हमने प्राथमिकता दी और उसको तेज गति से आगे बढ़ाने का काम हमने किया और तब जा करके वो ब्रिज बना। इतना ही नहीं मैं गर्व से कह सकता हूं यह सरकार है जो देश में आज सबसे लंबी सुरंग, सबसे लंबी गैस पाइप लाइन, सबसे लंबा समुद्र के अंदर ब्रिज, सबसे तेज ट्रेन यह सारे निर्णय यही सरकार कर सकती है और समय सीमा में आगे बढ़ा रही है। इसी कालखंड में 104 सेटेलाइट छोड़ने का विक्रम भी इसी कालखंड में होता है।

इस बात का इन्‍कार नहीं किया जा सकता जो राष्‍ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में उल्‍लेखन किया और मैं कहना चाहूंगा लोकतंत्र कैसे होता है। शासन में रहे हुए हरेक का सम्‍मान कैसा होता है। लालकिले पर से भाषण निकाल दीजिए। आजादी के सभी कांग्रेस के नेताओं के लालकिले से भाषण निकाल दीजिए एक भाषण में किसी ने यह कहा हो कि देश में जो प्रगति हो रही है, उसमें सभी सरकारों का योगदान है। भूतपूर्व सरकारों का योगदान है, ऐसा एक वाक्‍य लालकिले पर से कांग्रेस के नेताओं ने बोला हो, तो जरा इतिहास खोल करके ले आइये। यह नरेंद्र मोदी लालकिले पर से कहता है कि देश आज जहां है पुरानी सभी सरकारों का भी योगदान है, राज्‍य सरकारों का भी योगदान है और देशवासियों का योगदान है। खुलेआम स्‍वीकार करने की हमारी हिम्‍मत है और यह हमारे चरित्र में हैं।

मैं आज बताना चाहता हूं गुजरात में जब मुख्‍यमंत्री था, तो उस मुख्‍यमंत्री के कालखंड में गुजरात की Golden Jubilee का Year था। हमने  Golden Jubilee Year मनाने में जो कार्यक्रम किए एक कार्यक्रम क्‍या किया, जितने भी राज्‍यपाल श्री के भाषण थे governor के, गवर्नर के भाषण क्‍या होते हैं, जैसे राष्‍ट्रपति का भाषण उस सरकार की गतिविधियों का उल्‍लेख करता है। गवर्नर का भाषण उस काल के राज्‍य सरकार के किए गए कामों का बयान करता है। सरकारें कांग्रेस की रही थी, गुजरात बनने के बाद। लेकिन हमने गुजरात बना तब से लेकर 50 साल तक की यात्रा में जितने भी गवर्नरों के भाषण थे, जिसमें सभी सरकारों के काम का ब्‍योरा था, उसका ग्रंथ प्रसिद्ध किया और उसको archives में रखने का काम किया। लोकतंत्र इसको कहते हैं। आप मेहरबानी करके, हर कुछ आप ही ने किया है, आपके यह परिवार ने किया है। इस मानसिकता के कारण आज वहां जाकर बैठने की नौबत आई है आपको। आपने देश को स्‍वीकार नहीं किया है और इसलिए आज यह कारण है कि दोगुनी रफ्तार से सड़के बन रही है। रेलवे लाइनें तेज गति से आगे बढ़ रही है, पोर्ट डेवलपमेंट हो रहे हैं, गैस पाइपलाइन बिछ रही है, बंद पड़े fertilizer plant उसको खोलने का काम चल रहा है, करोड़ों घरों में शौचालय बन रहे हैं और रोजगार के नये अवसर उपलब्‍ध हो रहे हैं।

मैं जरा कांग्रेस के मित्रों से पूछना चाहता हूं, रोजगारी और बेरोजगारी की आलोचना करने वाले उनसे मैं जरा पूछना चाहता हूं। आप जब बेरोजगारी का आंकड़ा देते हैं, तो आप भी जानते हैं, देश भी जानता है, मैं भी जानता है कि आप बेरोजगारी का आंकड़ा पूरे देश का देते हैं। अगर बेरोजगारी का आंकड़ा पूरे देश का है, तो रोजगारी का आंकड़ा भी पूरे देश का बनता है। अब आपको हमारी बात पर भरोसा नहीं होगा, मैं जरा कुछ कहना चाहता हूं और आप रिकॉर्ड के पास रहिए, पश्चिम बंगाल की सरकार, कर्नाटक की सरकार, ओडि़शा की सरकार और केरल की सरकार हम तो है नहीं वहां, न कोई एनडीए है। इन चार सरकारों ने स्‍वयं ने जो घोषित किया है, उस हिसाब से पिछले तीन-चार वर्ष में इन चार सरकारों का दावा है कि वहां करीब-करीब एक करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। क्‍या आप उनको भी इंकार करोगे क्‍या? क्‍या आप उस रोजगार को रोजगार नहीं मानोगे क्‍या? बेरोजगारी देश की और पूरे देश में रोजगारी का काम, और मैं इसमें देश के आर्थिक रूप से समृद्ध राज्‍यों की चर्चा नहीं कर रहा, भाजपा की सरकारों की चर्चा नहीं कर रहा हूं, एनडीए की सरकारों की चर्चा नहीं कर रहा हूं, मैं उन सरकारों की चर्चा कर रहा हूं जो सरकार में आपके लोग बैठे हैं और रोजगार के claim वो कर रहे हैं। या तो आप नकार कर दीजिए कि आपकी कर्नाटक सरकार रोजगार के जो आंकड़े बोल रही है, झूठे बोल रही है। बोलो।

और इसलिए देश को गुमराह करने की कोशिश मत कीजिए और ऐसे देश के सभी राज्‍यों के रोजगार भारत सरकार ने जो प्रयास किया है उसकी योजनाएं और आप जानते हैं एक साल में 70 लाख नये ईपीएफ में नाम रजिस्‍टर हुए हैं और यह 18 से 25 साल के नौजवान है बेटे-बेटियां हैं और इनका नाम जुड़ा है। क्‍या यह रोजगार नहीं है क्‍या? इतना ही नहीं जो कोई डॉक्‍टर बने, कोई इंजीनियर बने, कोई lawyer बने, कोई chartered accountant बने। इन्‍होंने अपने कारोबार प्रारंभ किए। अपनी कंपनियों में लोगों को काम दिया। खुद का रोजगार बढ़ाया। आप इसको गिनने को तैयार नहीं है। और आप जानते हैं, भलीभांति जानते हैं formal sector में सिर्फ 10 प्रतिशत रोजगार होता है, informal sector में 90 percent होता है। और आज informal को भी formal में लाने के लिए हमने कई ऐसे incentive और कई योजनाएं बनाने की दिशा में सफलतापूर्वक प्रयास किया है। इतना ही नहीं, आज देश का मध्‍यम वर्गीय परिवार का नौजवान वो नौकरी की भीख मांगने वालों में से नहीं है, वो सम्‍मान से जीना चाहता है, वो अपने बलबूते पर जीना चाहता है। मैंने ऐसे कई आईएएस अफसर देखे हैं कभी मैं पूछता हूं कि आपकी संतान क्‍या करती है? ज्‍यादातर मैं सोचता हूं कि शायद वो भी बाबू बनेंगे। लेकिन आजकल वो मुझे कह रहे हैं कि सर जमाना बदल गया है। हमारे पिताजी के सामने हम थे तो हम सरकारी नौकरी खोजते-खोजते यहां पहुंच गए। आज हमारे बच्‍चों को हम कहते हैं कि बेटा यहां आ जाओ, वो मना करता है और वो कहता है कि मैं तो स्‍टार्टअप चालू करूंगा।  वो विदेश से पढ़ करके आया है, बोले मैं स्‍टार्टअप चालू करूंगा। सब दूर देश के नौजवानों में यह aspiration है और भारत के नेतृत्‍व में कोई भी दल हो देश के मध्‍यमवर्गीय तेज और तर्रार जो नौजवान है, उनके aspiration को बल देना चाहिए, उनको निराश करने का काम नहीं करना चाहिए और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, skill development योजना, entrepreneurship training की योजना या सारी बातें देश के मध्‍यम वर्ग के ऊर्जावान नौजवानों को उसे aspiration को बल देने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं और उसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 10 करोड़ से ज्‍यादा Loan की स्‍वीकृति हुई है। यह आंकड़ा कम नहीं है और अभी तक यह 10 करोड़ लोन स्‍वीकृति में कहीं किसी की अटकी हुई, कोई बीच में दलाल आया, उसकी कोई शिकायत नहीं आई है। और यह भी तो इस सरकार के वर्ग कल्‍चर का परिणाम है। यह भी उस कल्‍चर का परिणाम है, कोई बिचौलिया नहीं आया। और उसका कारण था कि हमने जो प्रोडक्‍ट बनाई है, नीति नियम बनाए हैं, उसी का वो परिणाम था कि उसको बिना कोई गारंटी बैंक में जा करके उसको धन मिल सकता है। और यह 10 करोड़ लोन स्‍वीकृत हुई है, उसमें चार लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा पैसा दिया गया है। इतना ही नहीं यह लोन प्राप्‍त करने वाले लोग हैं उसमें तीन करोड़ लोग बिल्‍कुल नये उद्यमी हैं, जिनको कभी ऐसा अवसर नहीं आया जीवन में ऐसे लोग हैं क्‍या यह भारत की रोजगारी बढ़ाने का काम नहीं हो रहा है, लेकिन आपने आंखे बंद करके रखी है। और इसलिए आप सब अपने गीत गाने से ऊपर आ नहीं पा रहे हैं, और यह मानसिकता आपको वहीं रहने देगी। और यह भी अटल जी ने कहा है वो ही सच्‍चाई है कि आप छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, अटल जी ने कहा कि ‘छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता’ और इसलिए आप वहीं रह जाओगे, वहीं पर गुजारा करना है आपको।

मैं जरा पूछना चाहता हूं यह सब हमारे जमाने के, हमारे जमाने के गीत गाते रहते हैं। 80 के दशक में हमारे देश में यह गूंज सुनाई दे रही थी, 21वीं सदी आ रही है, 21वीं सदी आ रही, 21वीं सदी आ रही है। और उस समय यह कांग्रेस के नेता हर किसी को 21वीं सदी का एक पर्चा दिखाते थे। नौजवान नेता थे, नये-नये आए थे, अपने नाना से भी ज्‍यादा सीटें जीत करके आए थे और देश की जनता 21वीं सदी, 21वीं सदी.. और मैंने उस समय एक कार्टून देखा था, बड़ा ही interesting cartoon था कि रेल के पास प्‍लेटफॉर्म पर एक नौजवान खड़ा है और सामने से ट्रेन आ रही है। ट्रेन पर लिखा था 21वीं शताब्‍दी और यह नौजवान उस तरफ दौड़ रहा है। एक बुजुर्ग ने कहा खड़े रहो वो तो आने ही वाली है, तुम्‍हें कुछ करने की जरूरत नहीं है। 80 के दशक में 21वीं शताब्‍दी के सपने दिखाए जाते थे। सारे देर 21वीं सदी के भाषण सुनाए जा रहे थे और 21वीं सदी बात करने वाली सरकार इस देश में Aviation Policy तक नहीं ले पाई। अगर 21वीं सदी में Aviation Policy नहीं होगी, वो कैसी 21वीं सदी का आपने सोचा था? बेलगाड़ी वाली, यही आप चल रहे हैं।

भाइयों-बहनों, अध्‍यक्ष महोदया, एक Aviation Policy हमने बनाई और आज छोटे-छोटे शहरों में जो छोटी-छोटी हवाई पट्टियां पड़ी हुई थी, इसका हमने उपयोग किया और 16 नई हवाई पट्टियां जहां जहाज आना-जाना शुरू हो गया। 80 से ज्‍यादा Aviation के लिए संभावनाएं पड़ी हुई है, उस पर हम कार्य कर रहे हैं। tier-2, tier-3 इन शहरों में हवाई जहाज उड़ने वाले हैं। और आज देश में यह सुन करके यह तकलीफ होगी, आज देश में करीब-करीब साढ़े चार सौ जहाज, हवाई जहाज operational हैं। करीब-कीरब साढ़े चार सौ। आपको जान करके खुशी होगी कि हमारे इस initiative का परिणाम है कि इस वर्ष नौ सौ से ज्‍यादा नये हवाई जहाज खरीदने के order हिन्दुस्‍तान से गए हैं और इसलिए मैं मानता हूं और यह सफलता इसलिए नहीं मिली है कि सिर्फ हम निर्णय करते हैं। हम Technology का भरपूर उपयोग करते हैं, हम monitoring करते हैं। और रोड़ के काम को भी और रेल के काम को भी हम ड्रोन से देख रहे हैं। हम सेटेलाइट टेक्‍नोलॉजी के द्वारा, हम tagging कर रहे हैं। इतना ही नहीं अगर टॉयलेट बने तो mobile phone पर उसकी तस्‍वीर tag की जाती है। और इस प्रकार से हर चीज को सेटेलाइट की टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करते हुए आगे बढ़ाने का हमने काम किया है और उसके कारण मॉनिटरिंग के कारण गति भी आई है। monitoring के कारण transparency को भी ताकत मिली है।

मैं हैरान हूं अगर आधार मुझे बराबर याद है, जब हम चुनाव जीत करके आए। आप ही की तरफ से आशंकाएं पैदा की गई थी कि मोदी आधार को खत्‍म कर देगा। यह हमारी योजना है मोदी पटक देगा, मोदी आधार को आने नहीं देगा। आप मान करके चले थे और इसलिए आपने मोदी पर हमला बुलाने के लिए आधार का इसलिए उपयोग किया था कि मोदी लाएगा नहीं। लेकिन जब मोदी ने उसको वैज्ञानिक तरीके से लाया और उसका वैज्ञानिक उपयोग करने के रास्‍ते खोजे जो आपकी कल्‍पना तक में नहीं थे, और जब आधार लागू हो गया, अच्‍छे ढंग से लागू हो गया। गरीब से गरीब व्‍यक्ति को अच्‍छी तरह उसका लाभ मिलने लगा, तो आपको आधार का implementation बुरा लगने लग गया। चट भी मेरी, पट भी मेरी। यह खेल चलता है क्‍या? और इसलिए आज 115 करोड़ से ज्‍यादा आधार बन चुके हैं। करीब केंद्र सरकार की चार सौ योजनाएं Direct benefit transfer scheme से गरीबों के खाते में सीधे पैसे जाने लगे हैं। 57 हजार करोड़ रुपया, अरे आपने ऐसी-ऐसी विधवाओं को पेंशन दिया है, जो बेटी का जन्‍म नहीं हुआ, वो कागज़ पर विधवा हो जाती है। सालों तक पेंशन जाता है, पैसे जाते हैं, और मलाई खाने वाले बिचौलिए मलाई खाते हैं। विधवा के नाम पर, बुजुर्गों के नाम, दिव्‍यांगों के नाम पर, सरकारी खजाने से निकले पैसे बिचौलियों के जेब में गए हैं और राजनीति चलती रही है। आज आधार के कारण Direct benefit transfer से आप दुखी है, ऐसा नहीं है। आपका दुख का कारण है यह जो बिचौलियों की चाल थी, वो बिचौलियों की चाल खत्‍म हुई है और इसलिए जो रोजगार गया है बिचौलियों का गया है। जो रोजगार गया है, बेईमानों का गया है, जो रोजगार गया है देश को लूटने वालों का गया है।

अध्‍यक्ष महोदया, चार करोड़ गरीब और मध्‍यम वर्ग के परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्‍शन देने का सौभाग्‍य हम लाए हैं। आप कहेंगे कि लोगों के घरों में बिजली देने की योजना हमारे समय हुई थी। होगी, लेकिन क्‍या बिजली थी? क्‍या ट्रांसमिशन लाइनें थी? अरे 18 हजार गांव तक खम्‍बे तक नहीं लगे थे, 18वीं शताब्‍दी में जीने के लिए वो मजबूर हुआ था और आज आप यह कह रहे हैं कि हमारी योजना थी। और हम किसी भी development के लिए टुकड़ों में नहीं देखते। हम एक holistic integrated approach और दूरदृष्टि के साथ और दूरगामी परिणाम देने वाली योजना के साथ हम चीजों को आगे करते हैं। सिर्फ बिजली का विषय मैं बताना चाहता हूं। आपको पता चलेगा कि सरकार के काम करने का तरीका क्‍या है। हम किस तरीके से काम करते हैं। बिजली व्‍यवस्‍था सुधारने के लिए चार करोड़ घरों में, देश में कुल घर है 25 करोड़, चार करोड़ घरों में आज भी बिजली न होना मतलब कि करीब-करीब 20 percent लोग आज भी अंधेरे में जिंदगी गुजार रहे हैं। यह गर्व करने जैसा विषय नहीं है। और आपने यह हमें विरासत में दिया है, जिसको पूरा करने का हम प्रयास कर रहे हैं। लेकिन कैसे कर रहे हैं। हम बिजली व्‍यवस्‍था सुधारने के लिए चार अलग-अलग चरणों में चीजों को हमने हाथ लगाया। एक बिजली उत्‍पादन प्रोडक्‍शन, transmission, distribution और चौथा आता है connection। और यह सारी चीजें एक साथ हम आगे बढ़ा रहे हैं। सबसे पहले हमने बिजली के प्रोडक्‍शन बढ़ाने पर बल दिया। सौर ऊर्जा हो, हाइड्रो ऊर्जा हो, थर्मल हो, न्‍यूक्लिअर हो, जो भी क्षेत्र से बिजली हो सकती है और उस पर हमने बल दे करके बिजली का उत्‍पादन बढ़ाया। transmission network में हमने तेज गति से वृद्धि की। पिछले तीन सालों में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक प्रोजेक्‍ट पर काम किया। यह पिछली सरकार के आखिरी तीन वर्षों की तुलना में 83 percent ज्‍यादा है। हमने स्‍वतंत्रता के बाद देश में कुल स्‍थापित transmission line इसमें 2014 के बाद 31 percent यानी आजादी के बाद जो था, उसमें 31 percent अकेले हमने आ करके बढ़ाया। transformer capacity पिछले तीन साल में 49 percent हमने बढ़ाई है। कश्‍मीर से कन्‍या कुमारी, कच्‍छ से कामरो, निर्बाध रूप से बिजली को transmission करने के लिए सारा नेटवर्क का काम हमने खड़ा कर दिया। power distribution system मजबूत करने के लिए 2015 में उज्‍जवल डिस्‍कॉम इंश्‍योरेंस योजना यानी कि उदय योजना और राज्‍यों को साथ ले करके MOU करके आगे बढ़ाई है। बिजली डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों में बेहतर ऑपरेशन और फाइनेंशनल मैनेजमेंट साबित हो, उस पर हमने बल दिया है। इसके बाद कनेक्‍शन के लिए घर में बिजली पहुंचाने के लिए सौभाग्‍य योजना launch की है। एक तरफ बिजली पहुंचाना, दूसरी तरफ बिजली बचाना, हमने 28 करोड़ एलईडी बल्‍ब बांटे। मध्‍यम वर्ग का परिवार जो घर में बिजली का उपयोग करता है। 28 करोड़ बिजली के बल्‍ब पहुंचने के कारण 15 हजार करोड़ रुपया बिजली का बिल बचा है, जो मध्‍यम वर्ग के परिवार के जेब में बचा है। देश के मध्‍यम वर्ग को लाभ हुआ है। हमने wastage of time भी बचाया है, हमने wastage of money को भी रोकने के लिए ईमानदारी का प्रयास किया है।

अध्‍यक्ष महोदया, यहां पर किसानों के नाम पर राजनीति करने के भरपूर प्रयास चल रहे हैं और उनको भी मददगार लोग मिल जाते हैं। यह सच्‍चाई है कि आजादी के 70 साल के बाद भी हमारे किसान जो उत्‍पादन करते हैं करीब-करीब एक लाख करोड़ रुपयों का यह जो उत्‍पादित चीजें हैं फल हो, फूल हो, स‍ब्‍जी हो, अन्‍न हो यह खेत से लेकर स्‍टोर तक और बाजार के साथ जो सप्‍लाई चेंज चाहिए उसकी कमी के कारण वो सम्‍पदा बर्बाद हो जाती है। हमने प्रधानमंत्री किसान सम्‍पदा योजना शुरू की और हम उस infrastructure को बल दे रहे हैं कि किसान जो पैदावर करता है उसको रख-रखाव की व्‍यवस्‍था मिले, कम खर्चें से मिले और उसकी फसल बर्बाद न हो, उसकी गारंटी तैयार है।

सरकार ने सप्‍लाई चेन में नई infrastructure को तैयार करने में मदद करने का फैसला किया है। और इसके बाद जो एक लाख करोड़ बचेगें वो देश को किसानों को food processing में लगे हुए मध्‍यम वर्ग के नौजवानों को गांव में ही कृषि आ‍धारित उद्योगों के लिए अवसर की संभावना पैदा हुई है। हमारे देश में जितना कृषि का महत्‍व है उतना ही पशु-पालन का, वो एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। हमारे देश में पशु-पालन के क्षेत्र में आवश्‍यक प्रबंधन के अभाव में सालाना 40 हजार करोड़ रूपये का नुकसान होता है। हमनें पशुओं की चिंता करना कामधेनु योजना के द्वारा इन पशुओं का रख-रखाव की चिंता करने के लिए, उनके आरोग्‍य की चिंता करने के लिए एक बड़ा aggressive काम शुरू किया है। और उसके कारण कामधेनु योजना का लाभ देश के पशु-पालन को और जो किसान पशु-पालन करता है। उनको एक बहुत बड़ी राहत मिलने वाली है। हम दोगुना 22 में इनकम करने की बात करते हैं। 80 में 21वीं सदी की बात करना वो तो मंजूर था लेकिन मोदी अगर आज 2018 में आजादी के 75 साल वाले 2022 को याद करे तो आपको तकलीफ हो रही है। कि मोदी 22 की बात क्‍यों करता है। आप 80 में 21वीं सदी के गीत गाते थे। देश को दिखाते रहते थे। और जब मेरी सरकार निर्धारित काम के सा‍थ 2022 आजादी के 75 साल एक inspiration एक प्रेरणा उसको लेकर के अगर काम कर रही है। तो आपको उसकी भी तकलीफ हो रही है। और किसानों की आय दोगुना करना। आप शंकाओं में इसलिए जीते हैं कि आपने कभी बड़ा सोचा ही नहीं, छोटे मन से कुछ होता नहीं, छोटे मन से कुछ होता नहीं। आप किसान की आय दोगुना करनी क्‍या हम उसकी लागत में कमी नहीं कर सकते। Soil Health Card के द्वारा ये संभव हुआ है, Solar Pump के द्वारा ये संभव हुआ है। Urea Neem coating के कारण ये संभव हुआ है। ये सारी चीजें किसान की लागत कम करने के लिए काम आने वाली चीजे हैं ऐसी अनेक चीजों को हमनें आगे बढ़ाया है। उसी प्रकार से किसान को अपने किसानी कारोबार के साथ हमनें bamboo का निर्णय किया। अगर वो अपने खेत के किनारे पर bamboo लगाएगा। और आज उस bamboo का assured market है। आज देश हजारों करोड़ रूपये का bamboo import करता है। आपकी एक गलत नीति के कारण। क्‍या आपने bamboo को tree कह दिया, पेड़ कह दिया और उसके कारण कोई bamboo काट नहीं सकता था। मेरे north east के लोग परेशान हो गए। हममें हिम्‍मत है कि हमने bamboo को grass की category में लाकर के रखा। वो किसान की आय बढ़ाएगा। अपने खेत पर किनारे पर अगर वो bamboo लगाता है। उसकी छाया के कारण किसान को तकलीफ नहीं होती है। उसकी अतिरिक्‍त Income बढ़ेगी। हम दूध के उत्‍पादन को बढ़ाना चाहते हैं। प्रति पशु हमारे यहां दूध का उत्‍पादन होता है। उसको बढ़ाया जा सकता है। हम मधुमक्‍खी पालन पर बल देना चाहते हैं। आपको हैरानी होगी मधुमक्‍खी पालन में करीब-करीब 40 प्रतिशत वृद्धि हुई। मद export करने में हुए और बहुत कम लोगों को मालूम होगा। आज दुनिया holistic healthcare, ease of living इसपे बल दे रहा है और इसीलिए उसको chemical wax  से बचकर के  bee wax के लिए आज पूरी दुनिया में bee wax का बहुत बड़ा market है। और हमारा किसान खेती के साथ मधुमक्‍खी का पालन करेगा। तो bee wax के कारण उसको एक उत्‍तम प्रकार का और आय में भी बदलाव होगा। हम ये भी जानते हैं कि मधुमक्‍खी फसल को उगाने में भी एक नई ताकत देती है। अनेक ऐसे क्षेत्र हैं और ये सारे काम दूध उत्‍पादन, poetry farm, fisheries हो, bamboo होए value edition ये सारी चीजें हैं। जो किसान की आय को डबल करती है। हम जानते हैं कि जो लोग सोचते थे आधार कभी आएगा नहीं- आ गया, उनको ये भी परेशानी थी कि जीएसटी नहीं आएगी और हम सरकार को डुबोते रहेंगे। अब जीएसटी आ गई, आ गई तो क्‍या करें तो नया खेल खेलो, ये खेल चल रहा है। कोई देश की राजनीतिक नेतागिरी देश को निराश करने का काम कभी नहीं करती। लेकिन कुछ लोगों ने इस काम का रास्‍ता अपनाया है। आज सिर्फ जीएसटी के कारण logistic में जो फायदा हुआ है। हमारी ट्रक पहले जितना समय जाता था उसका wastage जाम के कारण, टोल टैक्‍स के कारण। आज उसका वो बच गया। और हमारी transportation की capacity को 60 प्रतिशत डिलीवरी की ताकत नई आई है। जो काम पांच छह दिन में एक ट्रक जाकर करता था1 वो आज ढाई-तीन दिन में पूरा कर रहा है। ये देश को बहुत बड़ा फायदा हो रहा है। हमारे देश में मध्‍यम वर्ग भारत को आगे ले जाने में उसकी बहुत बड़ी भूमिका है। मध्‍यम वर्ग को निराश करने के लिए भ्रम फैलाने के प्रयास हो रहे हैं। हमारे देश का मध्‍यम वर्ग का व्‍यक्ति good governance चाहता है। बेहतरीन व्‍यवस्‍थाएं चाहता है। वो अगर ट्रेन की टिकट ले तो ट्रेन में उसके हक की सुविधा चाहता है। अगर वो कॉलेज में बच्‍चे को पढ़ने के लिए भेजे तो उसको अच्‍छी शिक्षा चाहता है। बच्‍चों को स्‍कूल भेजे तो स्‍कूल में अच्‍छी शिक्षा चाहता है। वो खाना खरीदने जाए तो खाने की quality अच्‍छी मिले ये मध्‍यम वर्ग का व्‍यक्ति चाहता है। और सरकार का ये काम है। कि पढ़ाई की बेहतर संस्‍थान हों, उचित मूल्‍य पर उसको घर मिले, अच्‍छी सड़कें मिलें, ट्रांसपोर्ट की बेहतर सुविधाएं मिलें, आधुनिक Urban Infrastructure हो, मध्‍यम वर्ग की आशा-आंकाक्षाओं को पूरा करने के लिए ease of living के लिए ये सरकार डेढ़ साल से कदम उठा रही है। हमनें और ये सुनकर के हैरान हो जाएगें ये लोग entry level income tax दुनिया में 5 प्रतिशत की दर पर सबसे अगर कम कहीं है तो भारत हिन्‍दुस्‍तान में है। जो गरीबों को किसी समृद्ध देश में भी नहीं है, समृद्ध देश में भी नहीं है वो हमारे यहां है। 2000 के पहले बजट में टैक्‍स से छूट की सीमा पचास हजार रूपया बढ़ाकर ढाई लाख रूपया कर दिया गया था। इस वर्ष बजट में चालीस हजार रूपये का standard deduction हमनें मंजूर कर दिया है। senior citizen को टैक्‍स में छूट का भी प्रावधान किया है। मध्‍यम वर्ग को करीब 12 हजार करोड़ रूपये का सालाना नया फायदा ये जुड़ता जाए ये काम हमारी सरकार ने किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 31 हजार करोड़ से ज्‍यादा खर्च हमनें किया है। ब्‍याज में पहली बार इस देश में मध्‍यम वर्ग के लोगों को ब्‍याज में राहत देने का काम इस सरकार ने किया है। नए एम्‍स, नई आईआईटी, नए IIM 11 बड़े शहरों में मेट्रो 32 लाख से ज्‍यादा street LED light कर दी गई है। और इसलिए नए उद्यमों MSME ये कोई इंकार नहीं कर सकता। MSME क्षेत्र के साथ जुड़े लोग ये मध्‍यम वर्ग और उच्‍च मध्‍यम वर्ग है। ढाई सौ करोड़ के turnover पर हमनें टैक्‍स रेट 30 प्रतिशत से कम करके 25 प्रतिशत करके मध्‍यम वर्ग के समाज की बहुत बड़ी सेवा की है। 5 प्रतिशत दिया है। 2 करोड़ रूपये तक कारोबार करने वाले सभी व्‍यापारियों को केवल बैंकिग जनों के माध्‍यम से लेन-देन करते हैं। सरकार उनकी आय को turnover का 8 प्रतिशत नहीं 6 प्रतिशत मानती है। यानि उन्‍हें टैक्‍स पर 2 प्रतिशत का लाभ होता  है। जीएसटी में डेढ़ करोड़ रूपये तक की turnover वाले कारोबार को composition scheme दी और turnover का केवल एक प्रतिशत का भुगतान ये भी दुनिया में सबसे कम हिन्‍दुस्‍तान में करने वाली ये सरकार है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदया, जनधन योजना 31 करोड़ से ज्‍यादा गरीबों के बैंक अकांउट खुलना, 18 करोड़ से ज्‍यादा गरीबों को स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा की बीमा योजना का लाभ हो, 90 पैसे प्रतिदिन यो एक रूपया महीना इतना अच्‍छा प्रोडेक्‍ट वाला बीमा हमनें देश को, गरीबों को दिया। और आप, आपको ये जानकर के ये संतोष होगा कि इतने कम समय में ऐसे गरीब परिवारों के ऊपर आफत आई तो Insurance की योजना के कारण ऐसे परिवारों को दो हजार करोड़ रूपया उनके घर में पहुंच गया। ये, ये असामान्‍य काम हुआ है।

उज्‍ज्‍वला योजना के तहत तीन करोड़ तीस लाख मां-बहनों को, गरीब मां-बहन, अरे गैस का कनेक्‍शन के लिए ये एमपीओ के कुर्ते पकड़ कर चलना पड़ता था। हम सामने से जाकर के ये गैस कनेक्‍शन दे रहे हैं और अब संख्‍या हमनें 8 करोड़ करने का निर्णय किया है। 

आयुषमान भारत योजना मैं हैरान हूं क्‍या देश के गरीब को स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए। गरीब पैसो के अभाव में इलाज करवाने नहीं जाता है, वो मृत्‍यु को पसंद करता है। लेकिन बच्‍चों के लिए वो कर्ज छोड़कर के जाना नहीं चाहता है। क्‍या ऐसे गरीब निम्‍न वर्ग के परिवारों की रक्षा करने का निर्णय गलत हो सकता है क्‍या? हां आपको लगता है कि इस प्रोडेक्‍ट में कोई बदलाव  करना है तो अच्‍छे positive सुधार लेकर के आइए। मैं स्‍वयं समय देने के लिए तैयार हूं। ताकि देश के गरीबों को पांच लाख रूपये तक सालाना खर्च करें उसके काम आए सरकार लेकिन आप उसके लिए भी इस प्रकार के बयानबाजी कर रहे हैं। अच्‍छी योजना है, जरूर मुझे सुझाइए, हम मिल-बैठकर के नकी करेंगे, तय करेंगे।

अध्‍यक्ष महोदया जी, हमारी सरकार ने जो कदम उठाए हैं। उतने सरकार के जमात के भी सोचने के तौर तरीके में बदलाव किया है। जनधन योजना गरीब का आत्‍मविश्‍वास बढ़ाया है। बैंक में पैसे जमा कर रहा है। रूपये डेबिट कार्ड उपयोग कर रहा है। वो भी अपने-आपको समृद्ध परिवारों की बराबरी में देखने लगा है। स्‍वच्‍छ भारत मिशन महिलाओं के अंदर एक बहुत बड़ा आत्‍मविशवास पैदा करने का काम किया है। अनेक प्रकार की पीड़ाओं से उसको मुक्ति देने का कारण बना है। उज्‍जवला योजना गरीब माताओं को धुएं से मुक्ति दिलाने का काम कहा। पहले हमारा श्रमिक या तो अच्‍छी नौकरी पाने के लिए पुरानी नौकरी छोड़ने की हिम्‍मत नहीं करता था, क्‍योंकि पुराने जमा पैसे डूब जाएंगे। हमने उनके unclaimed 27 हजार करोड़ रुपया universal account number दे करके उस तक पहुंचाने का काम किया है और आगे गरीब मजदूर जहां जाएगा, उसका बैंक अकाउंट भी साथ-साथ चलता जाएगा। यह काम किया है। भ्रष्‍टाचार और कालाधन। अभी भी आपको रात को नींद नहीं आती। मैं जानता हूं आपकी बैचेनी भ्रष्‍टाचार के कारण जमानत पर जीने वाले लोग भ्रष्‍टाचार के कामों से बचने वाले नहीं हैं, कोई भी बचने वाला नहीं है। पहली बार हुआ है देश में, चार-चार पूर्व मुख्‍यमंत्री भारत की न्‍यायपालिका ने उनको दोषित घोषित कर दिया है और जेल में जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यह हमारा commitment है। देश को जिन्‍होंने लूटा है उनको देश को लौटाना पड़ेगा और इस काम में मैं कभी पीछे हटने वाला नहीं हूं। मैं लड़ने वाला इंसान हूं, इसलिए देश में आज एक ईमानदारी का माहौल बना है। एक ईमानदारी का उत्‍सव है। अधिक लोग आज आगे आ रहे हैं, Income Tax देने के लिए आ रहे हैं। उनको भरोसा है कि शासन के पास खजाने में जो पैसा जाएगा, पाई-पाई का हिसाब मिलेगा, सही उपयोग होगा। यह काम हो रहा है।

आज मैं एक विषय को जरा विस्‍तार से कहना चाहता हूं। कुछ लोगों को झूठ बोलो, जोर से झूठ बोलो, बार-बार झूठ बोलो, यह फैशन हो गया है। हमारे वित्‍त मंत्री ने बार-बार इस बात को कहा है, तो भी उनकी मदद करने चाहने वाले लोग, सत्‍य को दबा देते हैं और झूठ बोलने वाले लोग चौराहे पर खड़े रह करके जोरों से झूठ बोलते रहते हैं। और वो मसला है एनपीए का, मैं इस सदन के माध्‍यम से, अध्‍यक्ष महोदया आपके माध्‍यम से आज देश को भी कहना चाहता हूं कि आखिर एनपीए का मामला है क्‍या? देश को पता चलना चाहिए कि एनपीए के पीछे यह पुरानी सरकार के कारोबार है और शत-प्रतिशत पुरानी सरकार जिम्‍मेदार है, एक प्रतिशत भी कोई और नहीं है। आप देखिए उन्‍होंने ऐसी बैंकिंग नीतियां बनाई कि जिसमें बैंकों पर दबाव डाले गए टेलिफोन जाते थे, अपने चहेतों को लोन मिलता था। वो लोन पैसा नहीं दे पा रहे थे। बैंक, नेता, सरकार, बिचौलिये मिल करके उसका restructure करते थे। बैंक से गया पैसा कभी बैंक में आता नहीं था। कागज पर आता-जाता, आता-जाता चल रहा था और देश, देश लूटा जा रहा था। उन्‍होंने अरबों-खरबों रुपया दे दिया। हमने बाद में आ करके, आते ही हमारे ध्‍यान में विषय आया, अगर मुझे राजनीति करनी होती, तो मैं पहले ही दिन देश के सामने वो सारे तथ्‍य रख देता, लेकिन ऐसे समय बैंकों की दुर्दशा की बात देश के अर्थतंत्र को तबाह कर देती। देश में एक ऐसे संकट का माहौल आ जाता उससे निकलना मुश्किल हो जाता और इसलिए आपके पापों को देखते हुए, सबूत होते हुए मैंने मौन रखा, मेरे देश की भलाई के लिए। आपके आरोप मैं सहता रहा, देश की भलाई के लिए। लेकिन अब बैंकों को हमने आवश्‍यक ताकत दी है, अब समय आ गया है कि देश के सामने सत्‍य आना चाहिए। यह एनपीए आपका पाप था और मैं यह आज इस पवित्र सदन में खड़ा रह करके कह रहा हूं। मैं लोकतंत्र के मंदिर में खड़ा रह करके कह रहा हूं। हमारी सरकार आने के बाद एक भी लोन हमने ऐसी नहीं दी है जिसको एनपीए की नौबत आई हो। और आपने छुपाया, आपने क्‍या किया, आपने आंकड़े गलत दिए, जब तक आप थे, आपने बताया एनपीए 36 percent हैं। हमने जब देखा और 2014 में हमने कहा कि भई झूठ नहीं चलेगा सच कहो, जो होगा देखा जाएगा और जब सारे कागजात खंगालना शुरू किया तो आपने जो देश को बताया था वो गलत आंकड़ा था, 82 percent एनपीए था, 82 percent. मार्च 2008 में बैंकों द्वारा दिया गया कुल advance 18 लाख करोड़ रुपये और हमने छह साल में आप देखिए क्‍या हाल हो गया, 8 में 18 लाख करोड़ और आप जब तक मार्च 2000 तक बैठे थे, यह 18 लाख करोड़ पहुंच गया 52 लाख करोड़ रुपया, जो देश के गरीब का पैसा आपने लूटा था। और लगातार हम restructure करते रहे कागज पर हां, लोन आ गया, लोन दे दिया। आप ऐसे ही उनको बचाते रहे, क्‍योंकि बीच में बिचौलिए थे, क्‍योंकि वो आपको चहेते थे, क्‍योंकि आपको उसमें कोई न कोई हित छिपा हुआ था। और इसलिए आपने यह काम किया। हमने यह तय किया कि जो भी तकलीफा होगी सहेंगे, लेकिन साफ-सफाई और मेरा स्‍वच्‍छता अभियान सिर्फ चौराहें तक नहीं है। मेरा स्‍वच्‍छता अभियान इस देश के नागरिकों के हक के लिए इन आचार-विचार में भी है। और इसलिए हमने इस काम को किया है।

हमने योजना बनाई चार साल लगे रहे। हमने recapitalisation पर काम किया है। हमने दुनियाभर के अनुभव पर अध्‍ययन किया है और देश की बैंकिंग सेक्‍टर को ताकत भी दी है। ताकत देने के बाद की आज मैं पहली बार चार साल आपके झूठ को झेलता रहा। आज मैं देश के सामने पहली बार यह जानकारी दे रहा हूं। 18 लाख से 52 लाख, 18 लाख करोड़ से 52 लाख करोड़ लूटा दिया आपने, और आज जो पैसे बढ़ रहे हैं वो उस समय के आपके पाप का ब्‍याज है। यह हमारी सरकार के दिए हुए पैसे नहीं है। यह जो आंकड़ा बदला है, वो 52 लाख करोड़ पर ब्‍याज जो लग रहा है उसका है। और देश कभी इस पाप के लिए आपको माफ नहीं करेगा और कभी न कभी तो यह चीजें इसका हिसाब देश को आपको देना पड़ेगा।

मैं देख रहा हूं, हिट और रन वाली राजनीति चल रही है, कीचड़ फैंकों और भाग जाओ, जितना ज्‍यादा कीचड़ उछालोगे कमल उतना ही ज्‍यादा खिलने वाला है और उछालो, जितना उछालना है, उछालो और इसलिए मैं जरा कहना चाहता हूं अब इसमें मैं कोई आरोप नहीं करना चाहता, लेकिन देश तय करेगा कि क्‍या है? आपने कतर से गैस लेने का 20 साल का कॉन्‍ट्रेक्‍ट किया था, और जिस नाम से गैस का कॉन्‍ट्रेक्‍ट किया था हमने आ करके कतर से बात की, हमने अपना पक्ष रखा, भारत सरकार बंधी हुई थी, आप जो सौदा कर गए थे हमको उसको निभाना था, क्‍योंकि देश की सरकार की अपनी एक विवशता होती है। लेकिन हमने उनको तथ्‍यों के सामने रखा, हमने उनको विवश किया और मेरे देशवासियों को खुशी होगी अध्‍यक्ष महोदया, यह पवित्र सदन में मुझे यह कहते हुए संतोष हो रहा है कि हमने कतार को renegotiation किया और गैस की जो हम खरीदी करते थे करीब-करीब आठ हजार करोड़ रुपये देश का हमने बचाया।

आपने आठ हजार करोड़ ज्‍यादा दिया था। क्‍यों दिया, किसके लिए दिया, कैसे दिया, क्‍या इसके लिए सवाल या निशान खड़े हो सकते हैं, वो देश तय करेगा, मुझे नहीं कहना है। उसी प्रकार से मैं यह भी कहना चाहूंगा ऑस्‍ट्रेलिया के अंदर गैस के लिए भारत सरकार का एक सौदा हुआ था। गैस उनसे लिया जाता था हमने उनसे भी negotiation किया, लम्‍बे समय का किया और आपने ऐसा क्‍यों नहीं किया, हमने चार हजार करोड़ रुपया उसमें भी बचाया। देश के हक का पैसा हमने बचाया, क्‍यों दिया, किसने दिया, कब दिया, किसके लिए दिया, किस हेतु से दिया, यह सारे सवालों के जवाब आपको कभी देंगे नहीं, मुझे मालूम है, देश की जनता जवाब मांगने वाली है।

छोटा सा विषय एलईडी बल्‍ब कोई मुझे बताए, क्‍या कारण था कि आपके समय में वो बल्‍ब तीन सौ, साढ़े तीन सौ रुपये में बिकता था। भारत सरकार तीन सौ, साढ़े तीन सौ में खरीदती थी। क्‍या कारण है कि वही बल्‍ब, कोई टेक्‍नोलॉजी में फर्क नहीं। कोई क्‍वालिटी में फर्क नहीं। देने वाली कंपनी वही, साढ़े तीन सौ का बल्‍ब, 40 रुपये में कैसे आने लगा। जरा कहना पड़ेगा, आपको कहना पड़ेगा, आपको जवाब देना पड़ेगा। मुझे बताइये सोलर एनर्जी क्‍या कारण है कि आपके समय सोलर पावर यूनिट 12 रुपया, 13 रुपया, 14 रुपया, 15 रुपया लूटो, जिसको भी लूटना है लूटो, बस हमारा ख्‍याल रखो। इसी मंत्र को ले करके चला। आज वही सोलर पावर दो रुपया, तीन रुपये के बीच में आ गया है। लेकिन उसके बावजूद  हम आप पर भ्रष्‍टाचार के आरोप नहीं लगाते। देश को लगाना है, लगाएगा। मैं उसमें अपने आप को संयमित रखना चाहता हूं। लेकिन यह हकीकत बोल रही है कि क्‍या हो रहा था और इसलिए, और आज विश्‍व में भारत का मान-सम्‍मान बढ़ा। आज भारत के पासपोर्ट की ताकत सारी दुनिया में जहां हिन्दुस्‍तानी हिन्‍दुस्‍तान का पासपोर्ट ले करके जाता है, सामने मिलने वाला आंख ऊंची करके गर्व के साथ देखता है। आपको शर्म आती है, विदेशों में जा करके देश की गलती गलत तरीके से पेश कर रहे हो। जब देश डोकलाम की लड़ाई लड़ रहा था, खड़ा था, आप चीन के लोगों से बात कर रहे थे। आपको याद होना चाहिए ससंदीय प्रणाली, लोकतंत्र, देश, विपक्ष, एक जिम्‍मेदार पक्ष क्‍या होता है? शिमला करार जब हुआ इंदिरा गांधी जी ने बैनजीर बुटो जी के साथ करार किया। हमारी पार्टी का इकरार था, लेकिन इतिहास गवाह है अटल बिहारी वाजपेयी इंदिरा जी का समय मांगा, इंदिरा जी को मिलने गए और उनको बताया कि देशहित में यह गलत हो रहा है, बस हमने बाहर आ करके उस समय देश का कोई नुकसान नहीं होने दिया था। देश की हमारी जिम्‍मेदारी होती थी। जब हमारी सेना का जवान सर्जिकल स्‍ट्राइक करता है, आप सवालिया निशान खड़ा करते हैं। मैं समझता हूं जब देश में एक कॉमन वेल्‍थ गेम हुआ इस देश में एक कॉमन वेल्‍थ गेम हुआ, अभी भी कैसी-कैसी चीजें लोगों के मन में सवालिया निशान बनी हैं। इस सरकार में आने के बाद 54 देशों का इंडिया अफ्रीका summit हुआ। ब्रिक्‍स समिट हुआ, फीफा अंडर-17 का वर्ल्‍ड कप हुआ। इतनी बड़ी-बड़ी योजनाएं हुई, अरे अभी 26 जनवरी को आसियान के 10 देश के मुखिया आ करके बैठे थे और मेरा तिरंगा लहरा रहा है। आपने सोचा नहीं था कभी, अरे जिस दिन नयी सरकार का शपथ हुआ और सार्क देशों के मुखिया आ करके बैठ गए तो आपके मन में सवाल था कि 70 साल में हमें क्‍यों समझ में नहीं आया छोटा मन बड़ी बात नहीं कर सकता है।

अध्‍यक्ष महोदया, एक न्‍यू इंडिया का सपना, उसको ले करके देश आगे बढ़ना चाहता हैं। महात्‍मा गांधी ने यंग इंडिया की बात कहीं थी, स्‍वामी विवेकानंद जी ने नये भारत की बात कही थी, हमारे राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जब पद पर थे तब भी नये भारत का सपना सबके सामने रखा था। आओ हम सब मिल करके नया भारत बनाने के संकल्‍प को पूर्ण करने के लिए अपनी जिम्‍मेदारियों का निर्वाह करे। लोकतंत्र में आलोचनाएं लोकतंत्र की ताकत है। यह होना चाहिए, तभी तो अमृत निकलता है, लेकिन लोकतंत्र झूठे आरोप करने का अधिकार नहीं देता है। अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए देश को निराश करने का हक नहीं देता है। और इसलिए मैं आशा करता हूं कि राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण को बोलने वालों ने बोल लिया, अब जरा आराम से उसको पढ़े। पहली बार पढ़ने पर समझ में नहीं आया, तो दोबारा पढ़े। भाषा समझ नहीं आई है, तो किसी की मदद लें। लेकिन जो black-white में सत्‍य लिखा गया है, उसको नकारने का काम न करें। इसी एक अपेक्षा के साथ राष्‍ट्र‍पति के अभिभाषण पर जिन-जिन मान्‍य सदस्‍यों ने अपने विचार व्‍यक्‍त किए, मैं उनको अभिनंदन करता हूं और मैं सबको कहता हूं कि सर्वसम्‍मति से राष्‍ट्रपति जी के अभिभाषण को हम स्‍वीकार करे। इसी अपेक्षा के साथ आपने जो समय दिया, मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं, धन्‍यवाद।


अतुल कुमार तिवारी/कंचन/वंदना/तारा

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Distinguished dignitaries on the dais,


Guests from India and abroad,


Ladies and Gentlemen


 I am very happy to be hereat the inauguration of the World Sustainable Development Summit.To those joining us from abroad:Welcome to India.Welcome to Delhi.


On the side lines of the Summit,I hope you shall have some timeto see the history and splendor of this city. This summitis a re-inforcement of India’s commitment to a sustainable planet,for ourselves and for future generations.


As a nation,we are proud of our long history and tradition of harmonious co-existencebetween man and nature.Respect for nature is an integral partof our value system.

Our traditional practicescontribute to a sustainable lifestyle.Our goal is to be ableto liveup to our ancient textswhich say, “Keep pure For the Earth is our MotherAnd we are her children”.


 One of the most ancient scriptures, the Atharva Veda, spells out

-माताभूमि: पुत्रोहंपृथिव्या:


This is the ideal we seek to live through our actions.We believethat all resources and all wealthbelongs to Nature and the Almighty.We are just the trustees or managers of this wealth. Mahatma Gandhi too, advocated this trusteeship philosophy.


Recently, National Geographic’s Greendex Report of 2014 which assesses the environmental sustainability of consumer choice,ranked India at the topfor its greenest consumption pattern.Over the years,the World Sustainable Development Summit has spread consciousnes about our actionsto preserve the purity of Mother Earthto all parts of the world.


This common desirewas on displayat COP-21 in Paris in 2015.Nations took a standto come togetherand work towards the common cause of sustaining our planet. As the world committedto bring about change,so did we.While the world was discussing'Inconvenient Truth’,we translated it into ‘Convenient Action’. India believes in growthbut is also committedto protecting the environment.


Friends, it was with this thoughtthat India,along with France, initiated the International Solar Alliance.It already has one hundred and twenty one members.It is perhaps,the single most important global achievementafter Paris.As part of the Nationally Determined Contributions. India committed to reducingthirty-three to thirty-five percentof emission intensityof its GDPduring 2005 to 2030.


Our goal of creating a carbon sink of two point five to three billion tonnes of carbon dioxide equivalent by 2030had once seemed difficult to many.Yetwe continue our steady progresson that path.According to the UNEP Gap Report,India is on track to meet its Copenhagen Pledge of reducing the emissions intensityof its GDPby twenty to twenty-five percent over 2005 levelsby 2020.


We are also on track to meet the 2030 Nationally Determined Contribution. The UN Sustainable Development Goalsput us on the pathof equality,equityand climate justice.While we are doingeverything that is required of us,we expect that others also join in to fulfil their commitmentsbased on Common but Differentiated Responsibilityand equity.


We must also stress on climate justice for all vulnerable populations.We in Indiaare focused on Ease of living –through Good Governance,Sustainable Livelihood and through Cleaner Environment.The campaign for clean Indiahas moved from the streets of Delhi to every nook and corner of the country.Cleanliness leads to better hygiene,better health,better working conditionsand there-by better income and life.


We have also launched a massive campaignto ensure that our farmersconvert agricultural waste to valuable nutrients, instead of burning them.


We are also happy to host the 2018 World Environment Dayto highlight our commitment and our continuing partnershipto make the world a cleaner place.


We also recognize the need to tackle the issue of water availability,which is becoming a major challenge.That is whywe have introduced the massive Namami Gange initiative. This programme,which has already started giving results,will soon revive  the Ganga,our most precious river.


Our country is primarily agrarian.Continued availability of water for agricultureis of importance.The Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojanahas been launched to ensurethat no farm goes without water.Our motto is ‘More crop, per drop.'


 India has a fairly decent report card on bio-diversity conservation.With only two point four percent of the world’s land area,India harbours 7-8 percent of the recorded species diversity,while supporting nearly eighteen percent of human population.


 India has gained international recognitionfor ten out of its eighteen Biosphere Reservesunder UNESCO’s Man and Biosphere programme.This is a testimony that our development is greenand our wildlife is robust.




India has always believed in making the benefits of good governance reach everyone.

Our mission of Sabka Saath Sabka Vikas is an extension of this philosophy.Through this philosophy, we are ensuringthat some of our most deprived areas experience social and economic progresson par with others.


 In this day and age,access to electricity and clean cooking solutionsare basicsthat every person must be provided with.These form the coreof any country’s economic development.


Yet,there are many in Indiaand outsidewho are strugglingin the absence of these solutions.People are forced to use un-healthy cooking techniques that cause indoor air pollution. I have been told that the smoke in a rural kitchenresulting from this is a serious health hazard.Yet,few talk about it.Keeping this in view we have launched two far-reaching initiatives- Ujjwala and Saubhagya.From the time that they were launched,these schemes have already impacted the lives of millions.With these twin programmes,the time when mothers would fetch dry wood from forestsor prepare cow dung cakes,to feed their familieswill be gone soon.Soon too,the images of traditional firewood stoves will only remain a picturein our social history texts.


Similarly,through Saubhagya Scheme,we are working towards electrifying every

house-holdin this country,mostly by the end of this year.We recognizethat only a healthy nationcan lead the process of development.Keeping this in mind,we have launchedthe world’s largest government funded health scheme.The programme will support hundred million poor families.


Our ‘Housing for All’and ‘Power for All ’initiativesalso stem from this same agendaof providing the basic amenities of lifeto those who cannot afford them.




You know that Indiais one sixth of the global community.Our development needs are enormous.Our poverty or prosperity will have direct impact on the global poverty or prosperity.People in India have waited too long for access to modern amenities and means of development.


We have committed to complete this tasksooner than anticipated.However,we have also saidthat we will do all this in a cleaner and greener way.To give you just a few examples.We are a young Nation.To give employment to our youth,we have decidedto make India a global manufacturing hub.We have launchedthe Make in India campaignfor this.However, at the same time, we are insisting on Zero defect and zero effect manufacturing.


As the world’s fastest growing major economy,our energy needs are immense. However,we have planned to draw One 175 Giga-Watts of energy from renewable sources by 2022.This includes 100 Giga-Watts from Solar Energyand another 75Giga-Watts from Wind and other sources.We have added more than14 Giga-Wattsto solar energy generationwhich was just about three Giga-Wattsthree years back.

With this,we are already the fifth largest producer of solar energyin the world.Not only this,we are also the sixth largest producerof renewable energy.


With growing urbanizationour transportation needs are growing too.But we are focusingon mass transportation systemsespecially metro rail systems.Even for cargo movement to long distances,we have started workingon national water-way systems.Each of our statesis preparing an action planagainst climate change.


This will ensurethat while we are working towards conserving our environment,we also

safe-guard our most vulnerable areas.One of our largest states,Maharashtra,has already adopted a plan of its ownin this direction.We intend to achieve each of our sustainable development objectiveson our own,but collaboration remains the key.

Collaboration between governments,between industries,and between people.The developed worldcan help us achieve them faster.


Successful climate action needs access to financial resources and technology.Technology can help countries like Indiadevelop sustainablyand enable the poor to benefit from it.




We are here todayto act upon the beliefthat we as humanscan make a difference to this planet.We need to understand that this planet,our Mother Earth,is one.And so, we should rise above our trivial differences of race, religion, and power, and act as one to save her.


With our deep rooted philosophyof co-existence with nature and co-existence with each other, we invite you to join us in the journey of making this planet a more safe and sustainable place.


 I wish the World Sustainable Development Summit a great success.


Thank You




Read more: Text of PM’s address at the inauguration of...

इतनी विशाल संख्‍या में आए हुए यहां पधारे हुए मेरे प्‍यारे देशवासियों आप सबको बहुत-बहुत नमस्‍कार। 

ये हमारे देश की कितनी बड़ी शक्ति है कि अगर मैं सिर्फ नमस्‍कार अपने यहां की अलग-अलग भाषाओं और बोलियों में करने लगूं तो घंटे निकल जाएंगे। यह विविधता पूरी दुनिया में और किसी देश में नहीं मिलेगी।

आज मैं मेरे सामने भारत के बाहर ओमान की धरती पर एक मिनी इंडिया देख रहा हूं। देश के अलग-अलग कोनों से आए हुए भारतीय अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय, एक भव्‍य तस्‍वीर का निर्माण आज मैं हमारी आखों के सामने देख रहा हूं।

मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए भारत माता की ...जय, भारत माता की ....जय, भारत माता की.... जय। वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम।

भाइयों और बहनों यह मेरी ओमान की पहली यात्रा है। दो घंटे पहले मैं यहां दुबई से आपके बीच आया हूं। आपने शायद टीवी में देखा होगा वहां मुझे World Government Summit में UAE के राष्‍ट्रपति के निमंत्रण पर Main Guest के रूप में Technology or Development के विषय पर Inaugural address देने का सौभाग्‍य मिला। यह सिर्फ किसी एक कार्यक्रम में भाषण देने तक का सीमित विषय नहीं है। ये घटना अपने आप में भारत की प्रगति का सम्‍मान है। जो आज दुनिया सम्‍मान दे रही है। अधिकृत दौरा मेरा आज हो रहा है लेकिन दस साल पहले जब मैं गुजरात में मुख्‍यमंत्री था तो मुख्‍यमंत्री के तौर पर मेरी अफ्रीका की यात्रा थी और इसी दौरान मैं Salalah से होकर गुजरा था। कुछ समय वहां रूका था और उस समय जो लोग मुझे वहां मिले थे उन सबसे आज फिर मुझे मिलने का सौभागय मिला। एक लंबे अरसे से ओमान आने का, आपके बीच आने का, आपसे मिलने का मेरा मन करता था लेकिन वो अवसर आज आया है।

ओमान सरकार को ओमान प्रशासन को उन व्‍यवस्‍थाओं के लिए मैं अंत:करण पूर्वक धन्‍यवाद देता हूं। साथियों भारत और ओमान के बीच संबंध सैंकड़ों हजारों वर्ष पुराने हैं। पांच हजार साल पहले भी गुजरात के लोथल पोर्ट से लकड़ी के जहाज ओमान तक आते थे...और लौटते समय ये जहाज लोथल से भी आगे दक्षिण की तरफ भारत के समुद्री तटों से होते हुए श्रीलंका तक जाते थे। इन हजारों वर्षों में व्यवस्थाएं बदल गई। भारत में गुलामी का एक लंबा कालखंड आया लेकिन हमारे सदियों पुराने व्‍यापारिक और आत्मीय संबंध वैसे ही बने रहे। भारत की आजादी के बाद दोनों देशों के बीच व्‍यापारिक और आर्थिक और सामाजिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए institution विकसित हुए। भारत के हमारे हिन्‍दुस्‍तान में जो मध्‍य देश प्रांत हैं वहां जो बीना refinery है वो बीना  refinery ओमान के सहयोग से चल रही है। वहीं भारतीय कंपनियों के डेढ़ हजार से ज्‍यादा Joint ventures यहां ओमान में काम कर रहे हैं। ओमान की प्रगति और विकास में भारत और भारत के सभी होनहार हमारे एक प्रकार से राष्‍ट्रदूत। यह आप सबकी भागीदरी रही है। सरकार की तरफ से तो एक राजदूत होता है लेकिन देश की तरफ से यहां पर लाखों राष्‍ट्रदूत ओमान में बैठे हुए हैं। आपने देखा होगा कि पिछले तीन साल से हम किस प्रकार एक नीति बनाकर खाड़ी के देशों के साथ भारत के पुराने और दोस्‍ती भरे रिश्‍तों को आज के समय के मुताबिक एक नया जामा पहना रहे हैं। एक नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। अनेक आयामों के साथ जोड़ रहे हैं। आपने ये भी गौर किया होगा कि भारत की बढ़ती हुई प्रगति और साथ के साथ-साथ खाड़ी देशों की भारत में रूचि दिन-ब-दिन बढ़ती चली जा रही है। ये आप लोग अनुभव करते हैं कि नहीं करते। आप लोग अनुभव करते हैं। चारों तरफ इसकी गूंज सुनाई दे रही है। Energy हो व्‍यापार हो, Investment हो, हर क्षेत्र में खाड़ी देशों और भारत के बीच संबंध अपने आप में और भी महत्‍वपूर्ण होते जा रहे हैं। जाहिर सी बात है कि ओमान के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों में भी एक नई Momentum आ आई है, एक नई गति आई है, एक नई ऊर्जा आई है। औमान भौगोलिक रूप से भारत का खाड़ी क्षेत्र में सबसे निकटतम हमारा पड़ोसी  है। और ये हमारा सौभाग्‍य है कि राज परिवार के भारत के साथ बहुत ही आत्मीय  और पुराना संबंध रहा है। His Majesty Sultan का भी भारत से अभिन्‍न नाता रहा है।

आज इतनी बड़ी संख्‍या में आप सबसे मुखातिब होने के लिए His Majesty Sultan  के नाम पर Stadium में मेरी मौजूदगी एक विशेष महत्‍व की घटना है। ये इस बात का भी प्रतीक है कि स्‍वयं His Majesty Sultan  और ओमान भारत और भारतीयों के साथ कितनी आत्मीयता रखते हैं। इस निहायत Special Gesture के लिए हम उनके बहुत-बहुत, बहुत कृतज्ञ है।

आपसे बातचीत के बाद मैं His Majesty से मिलने जा रहा हूं। और मैं उन्‍हें उनके स्‍वास्‍थ्‍य और लंबी आयु के लिए सवा सौ करोड़ देशवासियों की तरफ से, मेरी तरफ से, आप सबकी तरफ से शुभकामनाएं दूंगा। और मैं उनसे कहूंगा कि मेरे आने का मकसद हमारे दोनों देशों के बीच मित्रता को और भी मजबूत बनाना है। आप सबको ओमान में आज घर जैसा माहौल मिलता है। और वो ऐसे ही नहीं मिल रहा है। आपको यहां घर जैसा जो माहौल मिलता है वह यहां के लोगों, और यहां के नेतृत्‍व के उन मूल्‍यों के निशान हैं जिनको हम भारत में विविधता और सहअस्तिव के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण मानते हैं।

ओमान में रहने वाले मेरे करीब 8 लाख भाई बहन ये भारत के Goodwill Ambassador है। आपने ओमान के विकास के लिए अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है, अपना पसीना बहाया है, अपनी जवानी यहां खपा दी है। और मुझे खुशी है कि ओमान की सरकार भी आपके अथाह परिश्रम का पूरा सम्‍मान करती है।

भाइयों और बहनों हम भारतीयों का सामाजिक संस्‍कार ऐसा है कि हम हर समाज में आसानी से जगह बना लेते हैं। यही होता है न? जैसे दूध में शक्‍कर मिले तो मिल जाते हैं न? और दूध मीठा कर देते हैं। ये हमारे संस्‍कार है, ये हमारा स्‍वभाव है और ये हमें विरासत में मिला है। क्‍योंकि हम वसुधैव-कटुम्‍बकम यानि जो पूरे विश्‍व को एक परिवार मानकर के चलने वाले लोग है। समय और समाज के अनुकूल ढल जाना हमारे आचरण, हमारी परंपराओं, हमारे रीति-रिवाज इन सबको संभालते हुए हर किसी का आदर करना, हर परंपरा का सम्‍मान करना, यही तो भारत की विशेषता है र्और आप यहां भारत से दूर उन संस्‍कारों से उनको जीकर के यहां के सामान्‍य जीवन के दिलों को जीतने का एक अभूतपूर्व काम कर रहे हैं और इसलिए आप बधाई के पात्र हैं।

यही वजह है कि दुनिया का नक्‍शा भले बदल गया हो। बड़े-बड़े देश खत्‍म गए हों लेकिन भारत आज भी पूरी बुलंदी के साथ तेज गति से आगे बढ़ रहा है। रास्‍ता कितना ही कठिन हो, हालात कितने ही मुश्किल हों, हम वो लोग हैं जिन्‍हें संकटों से निकलना आता है। परिर्वतन के लिए बदलाव के लिए हमारे भीतर की जो छटपटाहट है हर निराशा से हमें आशा और उमंग के साथ बाहर निकलना ये हमारी रगों में है, ये हमार जज्‍बा है।

भाईयों और बहनों आज हर भारतीय न्‍यू इंडिया, न्‍यू इंडिया के संकल्‍प को पूरा करने के लिए जी-जान से जुटा हुआ है। दिन-रात काम कर रहा है। और ओमान में बैठे हुए आप लोग, हिन्‍दुस्‍तान में कोई अच्‍छी घटना घटे तो यहां आप लोगों की खुशियों को कोई पार नहीं होता है। आप खुशी से समाये नहीं रहते हैं। और एक-आध बुरी घटना पता चले तो आप लोग कितने बैचेन हो जाते हैं यही हम लोगों की विशेषता है- अपनापन।

हम एक ऐसे भारत के निर्माण की तरफ बढ़ रहे हैं जहां गरीब से गरीब व्‍यक्ति को भी आगे बढ़ने का समान अवसर मिले। जहां गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी सपने देख सके। उन सपनों को पूरा करने की आशा जगे। उन सपनों को पूरा करने के लिए पुरूषार्थ का उसको रास्‍ता मिले। जरूरत पड़े वहां कोई उंगुली पकड़ कर चलाने वाला मिले। और इसी भूमिका से सवा सौ करोड़ देशावासियों को साथ लेकर के आज देश प्रगति के पथ पर पहले से कहीं अधिक गुना ताकत से, गति से न्यू इंडिया के सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ रहा है।

Minimum Government, Maximum Governance इस मंत्र के साथ हम देश के आम नागरिक की जिंदगी को आसान बनाने के लिए Ease of living के लिए अनेक काम कर रहे हैं। प्रकियाओं को सरल बनाना, अनावश्‍यक कानूनों को खत्‍म करना, सरकारी दफ्तर में 40-50 पेज के फार्म को 4-5 पेज के फार्म पर ले आना, उन्‍हें Online भरने की व्‍यवस्‍था बनाना, लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना, उन पर Action लेना इन सारे कार्यों को हमनें सरकार के Culture में शामिल करने के लिए भरपूर प्रयास किया है।

सरकार तो वही है, लोग वही हैं, वही Bureaucracy है, वही साधन है, वहीं संसाधन है, वही फाइल है, वही बाबू है, सबकुछ वही है लेकिन नतीजे कुछ और आ रहे हैं। बदलाव महसूस होने लगा है। बदले हुए भारत में आज गरीब से गरीब भी उसको बैंकों से दुत्कार कर नहीं भगाया जा सकता है। बदले हुए भारत में अब सरकार घर पर जाकर के, सामने से जाकर के, गरीब विधवा के घर तक जाकर के उसको गैस का कनेक्‍शन दे रही है। जिसके घर में आज भी अंधेरा है। उन घरों को ढूंढकर के मुफ्त में बिजली कनेक्‍शन देने का अभियान आज सरकार चला रही है।

आज देश में... और आप ओमान वालों को थोड़ा, मोदी जी ऐसा कैसे हो सकता है। आप विश्‍वास नहीं करेंगे। Insurance शब्‍द सुनते ही ऐसा लगता था कि ये तो अमीरों का काम है ये तो बड़े-बड़े लोगों के साथ जुड़ा हुआ विषय है। आज दिल्‍ली में ऐसी सरकार आपने काम करने का अवसर दिया है कि गरीबों को सिर्फ 90 पैसे प्रतिदिन और दूसरी योजना है। कि 1 रूपया महीना के प्रीमियम पर जीवन और सुरक्षा बीमा दिया जा रहा है। 90 पैसे, मैं चाय वाला हूं। इसलिए मुझे मालूम है कि चाय भी नहीं आती 90 पैसे में। इन बीमा योजनाओं के तहत जिन परिवारों का बीमा था और उनके परिवार में कोई आपत्ति आई तो आपको जानकर के संतोष होगा कि गरीबों के प्रति संवेदनशील सरकार जब होती है और योजना ऐसी बनाती है तो उसका परिणाम क्‍या होता है कि गरीब के परिवार में कोई संकट आया, कोई मुसीबत आई तो Insurance वाले थे। ऐसे परिवारों को ज्‍यादा समय नहीं हुआ है। मुश्किल से एक साल हुआ है। करीब-करीब दो हजार करोड़ रूपये उसके Claim राशि ऐसे गरीब परिवारों को दी जा चुकी है। आप में से कईयों को अनुभव आया होगा। आपके परिवार रिश्‍तेदारों को आना होगा तो पता चला होगा।  

साथियों, आप लोगों को नया पासपोर्ट बनवाने के लिए, पासपोर्ट renew करवाने के लिए भटकना नहीं पड़ता है। हमने पोस्‍ट आफिस में भी पासपोर्ट की व्‍यवस्‍थाओं को विस्तृत किया है ताकि सामान्‍य मानवी को, जो पासपोर्ट पहले हफ्ता, 15 दिन के बाद भी मिलेगा या नहीं मिलेगा वो आशंका थी आज Efficiency के कारण decentralize व्‍यवस्‍था के कारण पोस्‍ट आफिस में उस काम को जोड़ने के  कारण एक या दो दिन में आज पासपोर्ट आ जाता है।

हमारे देश में कोई उद्योग करना चाहता है। नई कंपनी बनाना चाहता है। पूँजी लगाना चाहता है तो एक जमाना था कि नई कंपनी रजिस्‍टर करवाने में पहले कई-कई दिन लग जाते थे। मैं संतोष के साथ कहता हूं कि आज वो काम सिर्फ और सिर्फ 24 घंटे में हो जाता है। आपने पहले सुना होगा कि सरकारें घोषणाएं करती रहती थी कि हमने ये कानून बनाया, हमने वो कानून बनाया, हमने ठिगना कानून बनाया, हमने फलाना बनाया। यही सुना था न आप लोगों ने, यही सुनते थे। मैं उससे उल्‍टी खबर देना चाहता हूं। जहां जरूरत हो वहां कानून बनाना पड़ता है बनाते भी हैं लेकिन हमारी सरकार बनने के बाद हमने अब तक करीब-करीब 1400-1500 जितने कानून, जिनकी अब आवश्‍यकता नहीं है वो सारे कानून खत्‍म कर देने का हमने काम कर दिया। 1400- 1450 कानून खत्‍म कर देना यानि एक प्रकार से मेरे कार्यकाल में हर दिन एक कानून खत्‍म होता है। सामान्‍य नागरिक पर इन कानूनों का जमाव एक बोझ बन जाता है। उसे मुक्ति की सांस मिले इसलिए बदलाव लाने की दिशा में, पुराने बोझ से मुक्ति के लिए इन कानूनों को हम बदल दें।

आपने इस बार का बजट भी अगर ध्‍यान से देखा होगा तो, इस बजट में ऐसी योजना का ऐलान किया है जिस योजना ने पूरी दुनिया का ध्‍यान खींचा है। आपके भी ध्‍यान में आया होगा, हो सकता है मैं जो नाम कहूं वो शायद आपने न सुना हो लेकिन कुछ और नाम सुना हो। अभी जो हम बजट के अंदर लाए हैं। आयुष्‍मान भारत योजना। इस आयुष्‍मान भारत योजना के माध्‍यम से हमनें देश के दस करोड़ गरीब परिवारों यानि करीब-करीब 40-50 करोड़ नागरिक, हिन्‍दुस्‍तान के 40-50 करोड़ नागरिक, इन लोगों के लिए, Health Insurance, इसके लिए आयुष्‍मान भारत योजना घोषित की है। और ये योजना ऐसी है यानि 40-50 करोड़ लोगों को जिसका लाभ रहेगा एक परिवार, एक साल में 5 लाख रूपये तक उसका मुफ्त में इलाज होगा, उसकी बीमारी का 5 लाख तक का खर्चा इस Insurance व्‍यवस्‍था के माध्‍यम से सरकार भरपाई करेगी।

अब आयुष्‍मान भारत कहा तो शायद आप लोगों को भी लगा होगा कि ये तो यार सुना नहीं है लेकिन पिछले दिनों आपने देखा होगा। हिन्‍दुस्‍तान के अखबारों ने उसको नया नाम दिया है। वाह.. किसी ने सुना है। हिन्‍दुस्‍तान के अखबारों ने उसको मोदी केयर के रूप में और हमारे विरोध करने वाले भी इस योजना का विरोध नहीं कर रहे हैं वो ये कहते है कि भई योजना तो अच्‍छी है पर करोगे कैसे?

भाइयों और बहनों हिन्‍दुस्‍तान ऐसा देश कि अगर एक बार जो वो ठान ले फिर वो करके ही रहता है। Ease of living के लिए ऐसी अनेक योजनाएं भारत के सवा सौ करोड़ लोगों की जिंदगी को आसान बना रही है।

भाइयों और बहनों सरकारें आती हैं, जाती हैं, लोग आते हैं, जाते है। महत्‍वपूर्ण ये है कि सरकार किस quality की गवर्नेंस दे रही है। Style of गवर्नेंस पहले भी था जिसमें योजनाएं 30-30, 40-40 साल तक पूरी नहीं होती थी। मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था। वहां एक सरदार सरोवर बाँध , नर्मदा योजना पंडित नेहरू जी ने शिलान्‍यास किया था। और अभी, अभी पिछले साल वो काम पूरा हुआ है। कभी-कभी तो ऐसा नजर आता था। बाँध बन जाता था लेकिन नहरों का अता-पता नहीं था। पुल बन जाते थे लेकिन कनेक्‍टिंग सड़के नहीं बन पाती थीं। खम्भे गढ़ जाते थे लेकिन उन पर कभी तार नहीं लगते थे और अगर तार लग भी गया तो लोग कपड़े सुखाते थे। बिजली नहीं आती थी। नई-नई ट्रेनों की घोषणा हो जाती थी लेकिन न तो कोई पटरियों के बारे में सोचता था, न ट्रेनों के बारे में सोचता था। अरे कागज पर भी कभी पटरियों को कभी पेंट नहीं किया जाता था। Style of misgovernance के साथ देश 21वीं सदी में आगे नहीं बढ़ सकता उसको बदलना पड़ता है। और बदलाना अनिवार्य होता है। और ऊपर से घोटालों की लंबी लिस्‍ट से देश के और दुनिया भर में देश की साख को नुकसान भी पहुंचा था। इस स्थिति से हम देश को अब बाहर निकाल करके लाएं है।

आज चार साल होने को आए हैं कोई ये नहीं कहता है। मोदी कितना ले गया। और मेरे देश के प्‍यारे भाइयों और बहनों आज मैं सर झुकाकर के नम्रता पूर्वक बड़े संतोष के साथ कहता हूं कि देश ने जिन मुझे आशा और अपेक्षाओं से बैठाया है उस पर मैं कभी खरोंच नहीं आने दूंगा। आज लेकिन उल्‍टा है। जहां भी जाऊं, जिसको भी मिलूं, even हमारे विरोधी भी मुझ पर आरोप नहीं लगाते हैं, लेकिन क्‍या करते हैं। जरा, मोदी जी बताओ कितना आया।  पहले लोग पूछते थे कितना गया अब मोदी को पूछते हैं कितना आया। मैं समझता हूं देश के अंदर जो ये विश्‍वास पैदा हुआ है। उसी विश्‍वास ने देश में नई आशा को जन्‍म दिया है। और वो नई आशा ही नए भारत के निर्माण के संकल्‍प को एक नया संबल दे रही है।

आज citizen friendly, development friendly, accountable administration पर फोकस करते हुए हम देश को आगे बढ़ाने के लिए काम रहे हैं। और उसका परिणाम आज मैंने जैसे पहले कहा महसूस हो रहा है।

आज देश में सड़क बनने की रफ्तार, रेल की पटरियां बिछाने की रफ्तार, रेल लाइन के बिजलीकरण की रफ्तार, नए एयर-पोर्ट बनाने की रफ्तार, सरकार द्वारा गरीबों के लिए घर बनाए जाने की रफ्तार, बैंक खाते खोलने की रफ्तार, गैस कनेक्‍शन देने की रफ्तार सभी कुछ पहले के मुकाबले कोई काम दो गुना ज्‍यादा, तीन गुना ज्‍यादा की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।

आप हैरान होंगे, हमारे देश में हम 21वीं सदी के पहले दो दशक अब पूर्णता पर पहुंचे है। कितनी सरकारें आई, गई दुनिया बदल चुकी है लेकिन भारत की अपनी Aviation Policy नहीं थी, aviation policy नहीं थी। हमने आकर के Aviation Policy बनाई। और देश के जो छोटे-छोटे शहर है District Headquarter जैसे tier-2, tier-3 city वहां पुरानी हवाई पट्टियां पड़ी थीं उनको जिंदा किया, उनको active किया। नए-नए एयर-पोर्ट बनाने की दिशा में अभियान चलाया। और प्‍यारे मेरे साथियों आपको जानकर के खुशी होगी, आज हमारे देश में करीब-करीब साढे चार सौ हवाई जहाज- private हो corporate हो public हो। साढे चार सौ हवाई जहाज अभी कार्यरत है। इस एक वर्ष में यानि 70 साल के कार्यकाल में हम पहुंचे हैं करीब-करीब साढे चार सौ हवाई जहाज, पूरे देश में कार्यरत हैं। इस एक वर्ष हमारे देश के अलग-अलग कंपनियों ने private कंपनियों ने, private लोगों ने करीब-करीब नए नौ सौ हवाई जहाज खरीदने का आर्डर दिया है। 70 साल की यात्रा में साढे चार सौ और इस एक वर्ष में करीब-करीब नौ सौ हवाई जहाज के आर्डर बुक हो चुके हैं। क्‍यों? क्‍योंकि हमारी नीति में हमने कहा है। कि हवाई चप्‍पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में सफर करे। ये हम चाहते हैं।

साथियों, अगर बिल्‍कुल जमीनी स्‍तर पर जाकर चीजों को ठीक नहीं किया होता तो ये जो आप प्रगति देख रहे हैं, ये गति देख रहे हैं ये कभी संभव नहीं था। बड़े और स्थाई परिवर्तन ऐसे नहीं आते हैं। उसके लिए पूरे सिस्‍टम में बदलाव करना पड़ता है और जब ये बदलाव होते हैं तभी देश सिर्फ तीन साल के अंदर-अंदर Ease Of Doing Business की, World Bank की ranking में एक साथ 42 पायदान कूदकर के 142 से उठकर के आज 100 पर आकर के पहुंच गया है और पूरी दुनिया को आश्‍चर्य हो गया है।

भाइयों और बहनों देश में अब 21वीं सदी की जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए Next Generation Infrastructure का निर्माण किया जा रहा है। विशेषकर Transport Sector को हम ऐसे तैयार कर रहे है कि वो एक-दूसरे को support करने वाले बने। Highway, Airway, Railway, Waterway सभी को एक-दूसरे की जरूरत के हिसाब integrate किया जा रहा है।

सरकार ने भारत माला project के तहत 53 हजार किलोमीटर National Highway बनाने का काम शुरू किया है। 53 thousand kilometer देश के अलग-अलग क्षेत्रों में रेलवे corridors  पर काम चल रहा है। 11 बड़ें शहरों में मेट्रो का विस्‍तार भी किया जा रहा है। पिछले वर्ष ही मुझे Kochi मेट्रो के लोकार्पण का अवसर मिला था। चेन्‍नई मेट्रो के विस्‍तार का काम चल रहा है।

इस बजट में बेंगलूरू में भी हमने उसके लिए एक बहुत बड़ा बजट का प्रावधान किया है। इस तरह देश की Coastal economy और उससे जुड़े, हमारे समुद्र तट से जुड़े उनके infrastructure को develop करने के लिए हम सागर-माला इस नाम से भी एक कार्यक्रम चलाया है।

हमारे मछुआरें भाई बहनों को Blue Revolution Scheme शुरू की है और उन्‍हें आधुनिक trawler खरीदने के लिए भारत सरकार की तरफ से आर्थिक मदद दे रहे हैं। सरकार देश में 110 से ज्‍यादा waterways भी विकसित कर रही है। हमारे देश में उसकी उपेक्षा की गई। नदियों का उपयोग transportation के लिए किया जा सकता है। 110 ऐसे रास्‍ते हमनें identify किए है जो पर्यावरण की भी रक्षा करेंगे। ट्रांसपोटेशन का खर्चा कम करेंगे। consumer को उसके कारण चीजें सस्‍ते में मिलेगी।

भाईयों और बहनों आपमें से जो लोग 2022-23 में भारत आएंगे उन्‍हें देश एक और शानदार प्रगति देखने को मिलेगी। और वो होगी बुलेट ट्रेन।

मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन का काम पिछले साल शुरू कर दिया गया है। दो- सवा दो घंटों में आपको ये बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद पहुंचा देगी। बुलेट ट्रेन से भारत की वर्तमान व्‍यवस्‍था में सिर्फ एक incremental improvement ही नहीं लेकिन देश को एक आधुनिक technology और नया सर्विस डिलीवरी सिस्‍टम भी प्राप्‍त होने वाला है।

साथियों, अब भारत में फैसलों को टाला नहीं जाता। अब भारत ने एक नया स्‍वभाव बना लिया है। फैसलों को टालने का वक्‍त चला गया। अब हम फैसलों और चुनौतियों, हर चुनौतियों से हम टकराने की तैयारी करके आगे बढ़ रहे हैं। लक्ष्‍य तय करके योजनाओं को समय से पूरा किया जाता है। ये भारत में बदलते हुए work culture का उदाहरण है। ये न्‍यू इंडिया है, ये न्‍यू इंडिया का जीता-जागता सबूत है। यही वजह है कि पहले जहां देश में हर दिन ये हल्‍ला मचता था कि इतने करोड़ इस घोटाले में गए, उतने करोड़ उस घोटाले में गए। भाइयों और बहनों, जब साफ नियत, स्‍पष्‍ट नीति उसके साथ निर्णय लिए जाते हैं तो देश का पैसा बचता है। जब efficient तरीके से काम किया जाता है।, जब मौजूदा संसाधनों का अच्‍छे से अच्‍छा उपयोग किया जाता है तब देश का पैसा बचता है।

टेक्‍नोलॉजी की मदद से हमारी सरकार ने Direct Benefit Transfer Scheme के जरिए देश के 57 thousand cr से ज्‍यादा की लागत गलत हाथों में जा रही थी, उसे बचा लिया है। गरीब का पाई-पाई बचाने का काम किया है। Direct Benefit Scheme यानि subsidy का, pension का scholarship का, मजदूरी का जो पैसा लोगों के बैंक खाते में सीधे पैसा transfer किया जाता है। पहले ये राशि फर्जी नामों के सहारे बिचोलियों के पास चली जाती थी। अब ये सारा खेल हमारी सरकार ने बंद कर दिया है। इस तरह देश के लोगों का और विशेषकर मध्‍यम वर्ग का पैसा बच रहा है। हमारी उजाला योजना। भाइयों और बहनों वर्ष 2014 में पहले जो LED bulb हिन्‍दुस्‍तान में साढे तीन सौ रूपये से ज्‍यादा का था, वो अब 40-50 रूपये में मिलने लगा है। कहां तीन सौ-साढे तीन सौ रूपया और कहां 40-50 रूपया। सस्‍ते LED के अलावा जो लोग अपने घरों में इनका इस्‍तेमाल कर रहे हैं उन्‍हें हर साल 15 हजार करोड़ रूपये की अनुमानित बचत बिजली के बिल में हो रही है। ये मध्‍यम वर्ग के परिवार को लाभ हुआ है।

साथियों, आपको जानकर के आश्‍चर्य होगा कि जितनी बिजली एलईडी बल्‍बों से बच रही है। उतनी बिजली के उत्‍पादन में देश को 45 हजार करोड़ रूपये से ज्‍यादा खर्च हो जाते अगर लोगों की बचत और देश की बचत इन दोनों को जोड़ा जाए तो बचत का आंकड़ा बनता है- करीब-करीब 60 हजार करोड़ रूपये। एक और उदाहरण है fertilizer sector का भाइयों और बहनों हमारी नीतियों की वजह से एक भी नया fertilizer plant लगे बिना लगभग पुरानों की मैं बात कर रहा हूं। Efficiency बढ़ाई है और उसके कारण leakages को रोका। उसके कारण लगभग 18 से 20 लाख टन यूरिया ज्‍यादा उत्‍पादन होने लगा है। ये 20 लाख टन यूरिया अलग produce करने के लिए करीब-करीब 7 से 8 हजार करोड़ रूपये का सरकारी खर्च करना पड़ता जो बच गया और यूरिया मिलने लग गया। इतना ही नहीं साढे तीन से चार हजार करोड़ से विशेष मुद्रा की बचत हुई है जो बाहर से खरीदने में खर्च होता था। इसके अलावा सरकार को 800 से 900 करोड़ रूपये की subsidy की भी इसमें बचत हुई है। यानि अकेले Fertilizer Sector में Policy Intervention से, Efficiency बढ़ाने से, Monitoring करने से हमने देश के करीब-करीब 12 हजार करोड़ रूपये बचाए है। जो आपके हक का है, हिन्‍दुस्‍तानवासियों के हक का पैसा है।

भाइयों और बहनों हम पहले की सरकारों के समय हुए पेट्रोलियम समझौते, गैस समझौतों इसको जरा दोबारा देखने लगे, हम बारीकी से देखने लगे कि भई इतना सारा कैसा हुआ। अब 20-20, 25-25 साल के करार हुए हैं। 30 साल के करार हुए हैं। हमने जरा अध्‍ययन किया, अब भारत की साख भी बनी है। हमनें उन देशों के साथ चर्चा की और आपको ये जानकर के खुशी होगी। कतर और आस्‍ट्रेलिया से हम जो समझौते हुए थे उन समझौते को renegotiate किया और बदलाव हो चुका है और इस बदलाव के कारण पहले जो रूपये दिए जाते थे उसकी तुलना में 12 हजार करोड़ रूपये कम देना पड़ेगा। ये 12 हजार करोड़ रूपया देश का बचाया है।

भाइयों और बहनों ये सिर्फ चार योजनाएं मैंने आपको गिनाई और इनसे देश को होने वाली बचत करीब-करीब 1 लाख 40 हजार करोड़ रूपयों से भी ज्‍यादा है। आप बताइए। मेरे भाईयो-बहनों क्‍या 1 लाख 40 हजार करोड़ रूपया जो पहले जाता था। वो गरीब के हक का था या नहीं था। वो गरीब के हक का था या नहीं था, वो पैसा बचना चाहिए था कि नहीं बचना चाहिए था। वो पैसा गरीब के काम आना चाहिए था कि नहीं आना चाहिए था। इस सरकार ने एक ईमानदारी को लेकर इसी Approach, इसी commitment की वजह से देश में भ्रष्‍टाचार और कालेधन के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई भी हमनें साथ-साथ चला कर रखी है। करोड़ों कमा कर भी सरकार को टैक्‍स न देने वाले लोग बेनामी संपत्ति खड़ी करने वाले लोग, फर्जी कंपनियां बनाने वाले लोग, कालेधन का लेन-देन करने वाले लोग, बड़ी-बड़ी मछलियां इस समय सरकार के जांच के दायरे में है।

पिछले एक साल में आपको जानकर के आश्‍चर्य होगा। पिछले एक साल में करीब-करीब साढे तीन लाख, आप चौंक जाएंगे करीब-करीब साढे तीन लाख संदिग्‍ध कंपनियों का रजिस्‍ट्रेशन सरकार रद्द कर चुकी है, ताले लगा दिए हैं। साथियों, मेरे देशवासी इतना पैसा जो मेहनत करके भारत भेजते हैं वे देश की अर्थव्‍यवस्‍था को योगदान करता है। अब मेहनत करके कुछ न कुछ घर भेजते हैं वो पैसा जब देश की व्‍यवस्‍थाओं को बनाने में खर्च होता है तो उसकी ताकत अनेक गुना बढ़ जाती है और यहां बैठने वाले आपको भी एक संतोष होता है। एक समाधान होता है।

ईमानदारी से की गई कमाई, ईमानदारी से अगर इस्‍तेमाल होती है तो उसका कितना बड़ा परिणाम आता है और हमनें इस ईमानदारी को आगे बढ़ाने का दायित्‍व उठाया है।

साथियों, आपको यहां कभी-कभी किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है उस बारे में भी हम सजग है। आपको होने वाली परेशानियों को लेकर हम ओमान सरकार के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं और पूरी कोशिश करते हैं कि आपकी परेशानी जल्‍द से जल्‍द खत्‍म हो। e-migrate system और ‘मदद पोर्टल’ के माध्‍यम से भी आपकी दिक्‍कतों को कम करने का काम किया गया है।

सरकार के अनेक ऐसे प्रयासों का ही परिणाम है कि आज विदेश में रहने वाले हर भारतीय में एक विश्‍वास जगा है। उसमें ये विश्‍वास आया है कि अगर वो संकट में फंसा तो उसके देश की सरकार उसे वापस देश लेकर जाने के लिए हाजिर हो जाएगी। विदेश में उसके परिवार का एक honorary सदस्‍य ये भारत सरकार बन गई है।

साथियों, सबका साथ सबका विकास’ हमारी ये approach पूरे विश्‍व की सोच में बदलाव ला रही है। संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के द्वारा अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस का ऐलान भारत की पहल पर International Solar Alliance का गठन ऐसे उदाहरण हैं। जो भारत की बढ़ती साख और सार्मथ्‍य को परिभाषित कर रहे हैं।

आपके सर्मथन, आपके अनुभव से देश को लाभ हो रहा है पूरा राष्‍ट्र उसके लिए आप सभी का कर्जदार है। मैं आपको देश के विकास का, राष्‍ट्र निर्माण एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सेदार मानता हूं। मै पार्टनर मानता हूं। न्‍यू इंडिया के सपने को पूरा करने में आपके संकल्‍पों का प्रभाव भारत में भी दिखाई देगा। ये मुझे विश्‍वास है आप सब मेरे भाई बहन ये मेरा सौभाग्‍य है कि आज मुझे आपके दर्शन का अवसर मिला, आप स्‍वस्‍थ रहें, सकुशल रहे इसी कामना के साथ मैं अपनी बात को समाप्‍त करता हूं। मेरी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय

वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम  



अतुल तिवारी, हिमांशु सिंह, ममता.    



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Indian Space Programme plays a key role in enabling social upgradation of rural areas through space based inputs towards development of wastelands, identification of degraded lands for suitable reclamation measures, assessment of fodder crops for dairy industry, monitoring developmental activities under rural employment guarantee scheme & integrated watershed development programme, space based inputs for ground water, targeting surface waterbodies for tribal districts and monitoring irrigation infrastructure.

The efforts made by Indian Space Research Organisation benefitting rural and backward areas so far include:

  1. Mapping of wastelands (1986-2000, 2005-06, 2008-09 & 2015-16) for enabling prioritisation of watersheds, identification of areas for renewable energy projects and industrial corridor development.
  2. Mapping of land degradation (2005-06 & 2015-16), help in prioritisation of development in the rural areas.
  3. Prepared and deployed National level groundwater prospects maps, including locations for planning recharge structures, as a support for drinking water requirements for Ministry of Drinking Water & Sanitation.
  4. Geospatially enabled monitoring of developmental activities under the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA), for Ministry of Rural Development.
  5. Generation of sustainable land and water resources development plans in 180 districts for soil and water conservation and satellite data based monitoring   and evaluation of about 86,000 microwatersheds,  under Integrated Watershed Management Programme (IWMP) for Ministry of Rural Development.
  6. Mapping and monitoring of village water bodies for suitability to adopt aquaculture development in the tribal districts as a possible alternative livelihood support.
  7. Assessment of fodder crops in Gujarat, Rajasthan and Haryana for enabling sustainability of dairy industry, relevant in rural and backward areas.


This was stated by the Union Minister of State (Independent Charge) of the Ministry of Development of North Eastern Region (DoNER), MoS PMO, Personnel, Public Grievances & Pensions, Atomic Dr Jitendra Singh in a written reply to a question in the Lok Sabha today.




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Union Minister of Road Transport and Highways, Shri Nitin Gadkari has said that India is poised for a leap in Electric Mobility. He was addressing a press conference in the capital today after inaugurating the electric vehicle chargers- slow and fast charging-at an event, ‘Charging the Drive’ held at the NITI Aayog premises. Another attraction today was 17 electric vehicles, on display at NITI Aayog.

Shri Gadkari hailed it as the beginning of a new era through the historic and revolutionary steps taken by NITI Aayog to promote Electric Mobility. He said that the use of electric vehicles will help reduce the burgeoning crude oil imports that hit the exchequer as well as cause immense pollution. He said, “Aajkaprayas economy ko strong karega, imports substitution karega, pollution kamhogaaurrozgaarbadhegi”.

The Union Minister co-related the progress made in solar and wind energy with the potential of Electric Vehicles in future in India. He urged the industry to step forward for Make-in India Electric Vehicles and gave the mantra of “First come, first profit” at the same time keeping a stringent focus on quality. He encouraged use of electric vehicles in public transport, announcing the soon-to-be constructed 70 km electric ropeway system from DhaulaKuan, Delhi to Manesar. He also spoke about tackling on-ground issues such as by providing for Electric Charging stations at the prevalent petrol pumps infrastructure.

NITI Aayog CEO Mr. Amitabh Kant announced on this occasion that NITI Aayog would convert all of its fleet to Electric Vehicles, EV over the next 4 months. He said “We will push adoption across all segments including two wheelers, three wheelers and buses. NITI Aayog, Ministry of Road Transport and Highways, Ministry of Power, and Department of Heavy Industries will come together to bring about a revolution to support the PM’s initiative of using Technology for Make-in-India”.

Member, NITI AayogDr.V.K.Saraswat spoke about how greenhouse emissions can be reduced through the usage of alternate fuels in vehicles. He discussed the alternative technologies such as hydrogen fuel cells and ethanol based fuels and their potential applications across the economy.

The DG, DMEO and Adviser, Electric Mobility at NITI Aayog, Anil Srivastava spoke about the global disruptions in electric mobility and how India has come a long way in this field.

The event showcased the inauguration of the ABB, Chargepoint and Exicom electric vehicle charging stations and a quick charging demonstration of 17 Electric Vehicles on display. Hero Eco’s Photon Lithium bikes, Okinawa’s Praise and Ridge scooters, Lohia’sOma Star Li two-wheeler and Comfort Plus e-rikshaw, Shigan’s Green Rick Super (Passenger) & Green Cart (Garbage loader) raised the Make-in-India flag high and showcased the path to a vibrant electrically mobile future in India. The Hyundai Ioniq, the Mahindra eVerito, the Nissan Leaf, the E Tigor, Magic EV, Iris EV and Electric bus by TATA Motors were prominent show-stealers.

The event comes in the backdrop of the response to growing concerns about climate change and the transport sector’s dependence on fossil fuels. Many countries around the world have called for electrification of their transport fleet. For India, the electric mobility revolution is a disruption that will alter the projected scenario dramatically. However, the impetus to drive this revolution will come from the adequate availability of charging infrastructure. NITI Aayog, as the co-ordinating agency for electric mobility has taken the lead and proactively installed 2 Electric Vehicle charging stations in its premises which were inaugurated today.




Read more: India poised for a leap in Electric Mobility;...

The Vice President of India, Shri M. Venkiaha Naidu has said that the biggest challenge before all of us is environment and that vehicular pollution is a major concern. He was addressing the gathering after inaugurating the 10th Auto Summit being organized by the Federation of Automobile Dealers Association, here today.

The Vice President said that time has come to promote e-mobility through electric vehicles as an important alternative mode of transport and make necessary changes in auto sector to make it environment friendly. He further said that transformation in every sense is required and manufacturers, suppliers or dealers must follow ethical standards. It is the time that automobile industry, its dealers, environmentalists, scientists and the common man to join hands and adopt drastic measures to reduce vehicular pollution, he added.

The Vice President said that India is keen to reduce carbon dioxide emissions and the thrust being given to e-vehicles is expected to lower vehicular emissions. He further said that there is a huge potential for use of environmental-friendly electric vehicles, including hybrid technologies in the country. Usage of e-vehicles reduces operating costs, gives greater efficiency than gasoline engines and reduction in the dependency on fossil energy by using locally produced renewable energy, he added.

The Vice President said that major thrust needs to be given for vehicle-charging infrastructure and the creation of the right eco-system for promotion of e-vehicles. He further said that the demand for EV batteries manufacturing domestically will also create several jobs within the country and create consumer acceptance of the new technologies by providing the required information. The Indian automotive industry and organizations like FADA must gear up to meet the future requirements by adopting newer, cleaner technologies that are innovative and environmentally sustainable, he added.



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Ministry of Power, along with Department of Posts, for survey of un- electrified households in Assam, Chhattisgarh, Jharkhand, Madhya Pradesh and Odisha

Over 78% of households in the country electrified: Shri R K Singh

Minister of State (IC) for Power and New & Renewable Energy, Shri Raj Kumar Singh, in a reply to a question on the status of electrified rural households in the country today informed the Rajya Sabha that out of the total 18.10 crore rural households in the country, around 14.16 crore households (78.24%) have been electrified. The status of the electrified rural houses in the States is updated by the respective State DISCOMs on the Saubhagya web-portal. Further, Ministry of Power has taken the help of Department of Posts for survey of un-electrified households in five States viz. Assam, Chhattisgarh, Jharkhand, Madhya Pradesh and Odisha, the Minister added.

So far, Government of Madhya Pradesh and Chhattisgarh have submitted 151 DPRs (77 rural grid + 27 rural off-grid+ 47 urban) on the online portal Sanctions under Saubhagya are made against techno-economic appraisals and approvals of DPRs received, and disbursals made in a phased manner against completion of various activities & achievement of milestones as per scheme guidelines

Government of India launched Pradhan Mantri Sahaj Bijli Har Ghar Yojana – “Saubhagya” in September 2017 with an outlay of Rs. 16,320 crores including a Gross Budgetary Support (GBS) of Rs. 12,320 crores.  The objective of the scheme is to provide last mile connectivity and electricity connections to all households in rural and urban areas across the country.


State-wise details of rural households electrification

As on 15.01.2018

Sl. No.


Total No. of Rural Households

Total No. of Households Electrified

Balance No. of un-electrified Households


Andhra Pradesh





Arunachal Pradesh



































Himachal Pradesh





Jammu & Kashmir




















Madhya Pradesh























































Tamil Nadu















Uttar Pradesh










West Bengal













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